किराये में चल रहा है खलारी पशु चिकित्सालय

बदहाली : विगत 30 साल से खलारी का प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय निजी भवन में डकरा : विगत 30 साल से खलारी का प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय निजी भवन में चल रहा है. पिछले दिनों राज्य के मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने स्पष्ट आदेश था कि किसी भी हाल में निजी भवन से सरकारी संस्था […]

बदहाली : विगत 30 साल से खलारी का प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय निजी भवन में
डकरा : विगत 30 साल से खलारी का प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय निजी भवन में चल रहा है. पिछले दिनों राज्य के मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने स्पष्ट आदेश था कि किसी भी हाल में निजी भवन से सरकारी संस्था का कार्यालय नहीं चलाया जाना है. अगर ऐसा हो रहा है तो जवाबदेह पदाधिकारी की हाजिरी नहीं बनेगी. ऐसा ही आदेश झारखंड उच्च न्यायलय का भी है.
इसके बाद भी खलारी में पशु चिकित्सालय का भवन बनाने की कोई पहल नहीं हुई है. खलारी में भ्रमणशील पशु चिकित्सक प्रीति, पशुधन पर्यवेक्षक एबी प्रसाद, प्रवेधिक सहायक जयराम प्रसाद, अनुसेवक राम कुमार और रात्रि प्रहरी हरेंद्र सिंह पदस्थापित हैं. लेकिन एबी प्रसाद और राम कुमार को छोड़ कर करकट्टा अस्पताल में कभी कोई नहीं मिलते हैं.
डॉक्टर प्रीति दो साल से खलारी में पदस्थापित हैं, लेकिन क्षेत्र का कोई भी पशु पालक आज तक उन्हें नहीं देखा है. विभाग से नियमित रूप से उन्हें वेतन मिल रहा है. रात्रि प्रहरी हरेंद्र सिंह रांची में रहते हैं. प्रवेधिक सहायक जयराम प्रसाद मैक्लुस्कीगंज मेंरहते हैं.
मामला गंभीर है, इसे देखता हूं : बीडीओ
बीडीओ सह सीओ एसएन वर्मा ने कहा कि पशु चिकित्सक का कभी खलारी नहीं आना, यह गंभीर मामला है. अस्पताल कर्मी कहां हाजिरी बनाते हैं, इसका भी पता लगा कर संबंधित विभाग के बड़े अधिकारियों को बताया जायेगा.
मैक्लुस्कीगंज पशु अस्पताल में भी नहीं आते हैं चिकित्सक
डकरा. मैक्लुस्कीगंज प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय में डॉ शोभा मरांडी पदस्थापित हैं. वे भी कभी-भी अस्पताल नहीं आती हैं. उनसे मोबाइल पर संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया. इस अस्पताल में ए लकड़ा रात्रि प्रहरी है और वह लोहरदगा में रहता है. एक मात्र प्रवेधिक सहायक राजेंद्र भगत अस्पताल में बैठे मिलते हैं.
चार कमरे का है पशु चिकित्सालय
करकट्टा के जिस निजी भवन में अस्पताल चल रहा है, वह चार कमरे का है. जिसमें दो पर अनुसेवक रामकुमार का कब्जा है. एक में स्टोर है और एक जिसमें चिकित्सक को बैठने की व्यवस्था है, वह पुरी तरह जर्जर है. अस्पताल का सरकारी मोटरसाइकिल भी पिछले तीन साल से खराब पड़ा हुआ है.
अभी कुछ दिनों से बाहर हूं : डॉ प्रीति
डॉ प्रीति ने बताया कि मैं तो खलारी में ही रहती हूं. अभी कुछ दिनों से जरूरी काम से बाहर हूं. जब उनसे पूछा गया कि बायोमेट्रिक सिस्टम लागू होने के बाद आप हाजिरी कहां बनाती हैं तो उन्होंने बताया कि फिलहाल मशीन खराब है. खलारी और डकरा के कई पशु पालकों ने प्रभात खबर को बताया कि आज तक करकट्टा अस्पताल में कोई चिकित्सक नहीं मिला.

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