JPSC Exam Scam TDPL CID: झारखंड में सीआइडी की जांच में यह बात सामने आयी है कि जेपीएससी में परीक्षाओं के संचालन का काम कर रही कंपनी टीडीपीएल ने कई कंप्यूटर एक्सपर्ट्स को रखकर परीक्षा में फर्जीवाड़े का षड्यंत्र रचा. किसी को यूपी से, तो किसी को बिहार-झारखंड से टीम में शामिल किया गया. इनका काम ओएमआर शीट की स्कैनिंग, इमेज स्कैनिंग एवं डेटाबेस तैयार करना था.
सऊदी से लौटा संजय भी आरोपी
जांच में सामने आया कि एक आरोपी संजय कुमार सऊदी अरब की एक कंपनी में भी काम कर चुका है. जब वह भारत लौटा, तो टीडीपीएल से जुड़ गया. संजय भागलपुर के सुल्तानगंज थाना क्षेत्र का रहने वाला है. उसने ट्नी के रे रूप में वर्ष 2010 में लखनऊ की नोटिक कंसलटेंसी से काम शुरू किया और डेवलपर बना. अलगअलग कंपनियों में काम करने के बाद वह वर्ष 2019 में सऊदी अरब की डीएचए अरबिया नामक कंपनी में काम करने चला गया. वर्ष 2025 में उसे उस्मान ने झारखंड बुलाया.
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CID जांच में कई पेशेवरों की भूमिका उजागर
उस्मान भी कंप्यूटर एक्सपर्ट था. वह टीडीपीएल में काम कर रहा था. सीआइडी उसे गिरफ्तार कर चुकी है. एक अन्य आरोपी रांची का रमेश कुमार वर्ष 2016 तक सामलौंग के बीके इंस्टीट्यूट में इलेक्ट्रिकल इंस्ट्रक्टर के रूप में काम कर रहा था. उसने यह काम पांच साल तक किया. इसके बाद वह डॉन बॉस्को आइटीआइ में एडमिशन कंसल्टेंट बन गया. वह बीबीए और बीसीए के लिए अभ्यर्थियों की तलाश करता था. इसके बाद उसने दो पार्टनर्स के साथ मिलकर एक नर्सिंग कॉलेज खोला. यहीं उसकी मुलाकात मामले के एक अन्य आरोपी बुद्धेश्वर से हुई और वह जेपीएससी में गलत तरीके से सफल कराने वाले गिरोह में शामिल हो गया. रमेश ने कई अभ्यर्थियों से पैसे लेकर बुद्धेश्वर को देने की बात स्वीकार की है. उसने चार छात्रों से 40 लाख रुपये लेकर बुद्धेश्वर को देने की बात स्वीकार की है. बुद्धेश्वर को भी सीआइडी गिरफ्तार कर चुकी है. इसी प्रकार लखनऊ का प्रदीप कुमार सिंह भी कंप्यूटर एक्सपर्ट है. उसकी भी गिरफ्तारी हुई है.
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