डॉ सौरव स्नेहव्रत (एसोसिएट प्रोफेसर, एक्सएलआरआइ, जमशेदपुर)
Jharkhand Youth Survey: प्रभात खबर का महासर्वे बताता है कि राज्य का शिक्षित युवा जहां एक ओर सरकारी नौकरी की सुरक्षा चाहता है, तो दूसरी ओर वह उद्यमिता (Entrepreneurship) की ओर भी आकर्षित है. साथ ही बड़ी संख्या में युवा मानसिक तनाव और दबाव से भी जूझ रहे हैं. यह संकेत देता है कि राज्य के युवा भविष्य को लेकर काफी चिंतित हैं. ऐसे में यह महासर्वे नीति-निर्माताओं के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है.
सुरक्षित रोजगार की तलाश में युवा जब झारखंड के शिक्षित युवाओं से उनके सपनों के करियर के बारे में पूछा गया, तो लगभग आधे यानी 49.5 प्रतिशत ने सरकारी नौकरी को प्राथमिकता दी. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण नौकरी की सुरक्षा है. 23 से 28 वर्ष आयु वर्ग में यह प्रतिशत 62.2 तक पहुंच जाता है. यही वह आयु वर्ग है, जो पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने करियर को स्थिर बनाने की कोशिश करता है. सरकारी नौकरी के बाद 31.6 प्रतिशत युवा अपना व्यवसाय या स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं. वहीं, 14 प्रतिशत युवा कॉरपोरेट नौकरी और केवल 4.8 प्रतिशत युवा फ्रीलांस या गिग वर्क को पसंद करते हैं. सरकारी नौकरी की यह चाहत झारखंड के रोजगार बाजार की वास्तविकता को भी दिखाती है. युवाओं को लगता है कि अन्य विकल्प उतने सुरक्षित नहीं हैं.
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दिलचस्प यह है कि आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, राज्य की बेरोजगारी दर देश में (राज्यों में) सबसे कम है. वित्तीय वर्ष 2024 में युवा बेरोजगारी दर लगभग 3.6 प्रतिशत थी, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग में यह 9.9 प्रतिशत रही. फिर भी युवाओं में चिंता क्यों है ? इसका कारण है कि रोजगार की संख्या से अधिक महत्वपूर्ण उसकी गुणवत्ता है. कम वेतन वाले या अस्थिर रोजगार को लोग मजबूरी में स्वीकार कर लेते हैं, इसलिए समस्या रोजगार की उपलब्धता से अधिक अच्छे और सम्मानजनक रोजगार की है.
स्टार्टअप को देना होगा बढ़ावा
सरकारी नौकरी की भारी मांग के बावजूद, राज्य में स्वरोजगार और स्टार्टअप का इकोसिस्टम भी धीरे-धीरे जड़ें जमा रहा है. महासर्वे के अनुसार, 31.6 प्रतिशत युवा जोखिम उठाकर अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं और इसे अपना 'ड्रीम प्लान' मानते हैं. 23 से 28 वर्ष के युवाओं में से 30.1 प्रतिशत स्टार्टअप के जरिए स्वावलंबन का रास्ता तलाश रहे हैं. इसके अतिरिक्त, 29 से 35 वर्ष के 33 प्रतिशत युवा स्टार्टअप या स्वरोजगार में लगे हुए हैं. दिलचस्प बात यह है कि 35 वर्ष से अधिक उम्र के परिपक्व युवाओं में यह आंकड़ा सर्वाधिक है. इस वर्ग के 51.1 प्रतिशत लोग स्टार्टअप और रिस्क टेकिंग को प्राथमिकता देते हैं. भले ही एक बड़ा वर्ग अपना व्यवसाय शुरू करना चाहता है, लेकिन पूंजी की कमी, बाजार का सही ज्ञान न होना और सही मार्गदर्शन का अभाव युवाओं को सफलता को लेकर भयभीत करता है.
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55% युवा राज्य में ही चाहते हैं रोजगार
झारखंड के युवाओं के जीवन की एक बड़ी सच्चाई अवसरों की कमी है. 34.9 प्रतिशत युवाओं का मानना है कि सरकार को राज्य में ही रोजगार के अवसर बढ़ाने चाहिए, जबकि 20.5 प्रतिशत युवा अपने घर के आसपास ही रोजगार चाहते हैं. इससे स्पष्ट है कि अधिकांश युवा झारखंड में रहना चाहते हैं, लेकिन परिस्थितियां उन्हें बाहर जाने के लिए मजबूर करती हैं. झारखंड माइग्रेशन सर्वे 2023 के अनुसार, राज्य के लगभग 45 लाख लोग रोजगार के लिए बाहर काम कर रहे हैं. ये प्रवासी हर महीने करीब 2,549 करोड़ रुपए अपने परिवारों को भेजते हैं. यह राशि राज्य के हजारों परिवारों की आर्थिक जीवन रेखा बनी हुई है. पलायन करने वालों में अधिकांश युवा है. लगभग 80 प्रतिशत प्रवासी 40 वर्ष से कम आयु के हैं. महाराष्ट्र, गुजरात और पश्चिम बंगाल इनके प्रमुख स्थान है. झारखंड प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण राज्य है. प्रतिभाओं के हो रहे 'ब्रेन ड्रेन' को रोकने के लिए नीति-निर्माताओं को विशेष पहल करने की जरूरत है.
46% : आर्थिक स्थिरता के बाद ही शादी
महासर्वे के आंकड़े बताते हैं कि शादी और जीवनसाथी को लेकर युवाओं की सोच तेजी से बदल रही है. सर्वे के अनुसार, 46 प्रतिशत युवा 28 से 32 वर्ष की उम्र के बीच, आर्थिक रूप से स्थिर होने के बाद ही शादी करना चाहते हैं. इससे स्पष्ट होता है कि आज का युवा शादी को केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जीवन के एक महत्वपूर्ण निर्णय के रूप में देखता है. वह पहले करियर, आय और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है. वहीं, 27 प्रतिशत युवा 25 से 28 वर्ष की उम्र तक शादी के पक्ष में हैं. दूसरी ओर 20.5 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि वे अभी शादी के बारे में सोच ही नहीं रहे हैं. यह आंकड़ा बताता है कि शिक्षा, करियर और व्यक्तिगत विकास जैसे मुद्दे फिलहाल उनकी प्राथमिकता में हैं. केवल 6.5 प्रतिशत युवा ऐसे हैं जो मानते हैं कि शादी जरूरी नहीं है और वे जीवन भर अविवाहित रह सकते हैं.
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36% युवा बोले, अच्छी सैलरी मिले तो बाहर जाने को तैयार
महासर्वे के नतीजे राज्य के नीति-निर्माताओं के लिए संदेश म लेकर आए हैं. सर्वे में 36 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि यदि बेहतर वेतन मिले, तो वे तुरंत राज्य छोड़कर दूसरे स्थान पर काम करने चले जाएंगे. सबसे कम उम्र के युवाओं में यह प्रतिशत 55.9 तक पहुंच जाता है.
शिक्षा औक रोजगार के बीच बढ़ती दूरी
दरअसल, सर्वे में शामिल लगभग दो-तिहाई युवा स्नातक या स्नातकोत्तर हैं. यह बताता है कि झारखंड में उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं की संख्या बढ़ रही है, लेकिन शिक्षा व रोजगार के अवसरों के बीच अंतर भी बढ़ रहा है. 2011 की जनगणना के अनुसार, झारखंड की साक्षरता दर 66.4 प्रतिशत थी, जो राष्ट्रीय औसत 74 प्रतिशत से कम थी. महिला साक्षरता दर केवल 55.4 प्रतिशत थी. विभिन्न शैक्षणिक सर्वेक्षणों से यह भी सामने आया है कि प्राथमिक स्तर पर सीखने की गुणवत्ता अब भी चुनौती बनी हुई है. ऐसी स्थिति में डिग्रीधारकों की संख्या तो बढ़ रही है, लेकिन उनके अनुरूप रोजगार उपलब्ध नहीं हैं.
निजी क्षेत्र में अवसरों का अभाव
सर्वे में केवल 14 प्रतिशत युवा ही कॉर्पोरेट जॉब को अपना लक्ष्य मान रहे हैं. राज्य में बड़े उद्योगों और आईटी हब का विकास उस रफ्तार से नहीं हो पाया, जिसकी उम्मीद थी. बहुराष्ट्रीय कंपनियों की कमी के कारण स्किल्ड (कुशल) और तकनीकी रूप से दक्ष युवाओं को राज्य में योग्यतानुसार न तो काम मिल पाता है और न ही वेतन.
मानसिक स्वास्थ्य बड़ी चुनौती
36 प्रतिशत शिक्षित युवाओं ने कहा कि पिछले छह महीनों में उनकी सबसे बड़ी समस्या मानसिक तनाव, चिंता या साथियों का दबाव रहा है. यह प्रतिशत उन 35.7 प्रतिशत युवाओं के लगभग बराबर है, जिन्होंने कहा कि उन्हें कोई बड़ी समस्या नहीं हुई. यह संकेत देता है कि राज्य के युवा भविष्य को लेकर चिंतित हैं. भारत में अधिकांश स्कूलों में प्रशिक्षित काउंसलर नहीं हैं. वहीं, 140 करोड़ की आबादी के लिए मनोचिकित्सकों की संख्या भी बहुत कम है. युवाओं द्वारा सोशल मीडिया के उपयोग के आंकड़े चिंता बढ़ाते हैं, जो मानसिक सेहत के लिए चुनौती हैं.
