हार्ट अटैक को गैस की दिक्कत ना माने होते तो शायद सुदिव्य कुमार सोनू हमारे बीच होते, जानिए उनके जीवन से जुड़ी ये खास 5 बातें

सुदिव्य कुमार सोनू ने अपने निधन से पहले एक कार्यक्रम में कहा था कि व्यक्ति नश्वर है और विचार अमर है. आज जब सुदिव्य कुमार की ये बात सच हो गई है, आइए जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी 5 पांच प्रमुख बातें.

झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद यह जानकारी सामने आई है कि जब रात 12 बजे उन्हें पहली बार हार्ट अटैक आया, तो उनकी पत्नी ने डॉक्टर के पास जाने को कहा,लेकिन उन्होंने मना कर दिया. बाद में जब दर्द काफी बढ़ा तो लगभग डेढ़ बजे उन्होंने ड्राइवर से गाड़ी निकालने को कहा और अस्पताल के लिए निकले.

रास्ते में उन्हें दो बार उल्टी हुई, जब वे अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टर्स ने उनकी श्वासनली की सफाई की. इसकी वजह यह थी कि उल्टी में निकलने वाला पदार्थ उनके फेफड़े में चला गया था. उन्हें तुरंत ही वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो गई थी. 56 साल के सुदिव्य सोनू ने जुलाई में अपना जन्मदिन मनाया था. वे बहुत ही खुशमिजाज व्यक्ति थे. आइए जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी ये खास बातें-

1919 में मुंगेर से आया था परिवार

सुदिव्य सोनू के दादाजी को अंग्रेजों ने मुंगेर से यहां लाकर बसाया था. उस वक्त वे यहां रेलवे ट्रैक के कामकाज और कोयले की ढुलाई से संबंधित कामकाज की देखरेख कर रहे थे.

पीएचईडी डिपार्टमेंट में एक्जीक्यूटिव इंजीनियर थे पिता

सुदिव्य सोनू के पिता शंभूनाथ पीएचईडी डिपार्टमेंट में एक्जीक्यूटिव इंजीनियर थे. उनकी पोस्टिंग हमेशा अलग-अलग जगहों पर होती रहती थी. इसी वजह से सुदिव्य सोनू की पढ़ाई अलग-अलग शहरों में हुई थी.

पूर्णिया से किया इंटरमीडिएट

सुदिव्य कुमार सोनू ने बिहार के पूर्णिया से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की. उसके बाद उन्होंने इंजीनियरिंग काॅलेज में दाखिला लिया, लेकिन पढ़ाई पूरी नहीं की. उसके बाद वे राजनीति में सक्रिय हो गए.

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फोटोग्राफी के थे शौकीन


दोस्तो के साथ झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू

सुदिव्य कुमार सोनू को फोटोग्राफी का काफी शौक था. इसी वजह से वे अकसर घूमने जाया करते थे. वे स्वभाव से कुछ जिद्दी भी थे. कुछ समय पहले वे राजस्थान के रणथंबोर गए हुए थे. मृत्यु से पहले वे बेंगलुरु भी गए थे और उनके प्रयास से छह हाथी झारखंड लाए गए थे.

दो बेटी और एक बेटे के पिता हैं सुदिव्य

सुदिव्य कुमार सोनू की पत्नी हाउस वाइफ हैं. उनके तीन बच्चे हैं, जिनमें दो बेटी और एक बेटा शामिल है. बड़ी बेटी एमबीए कर रही हैं,दूसरी बेटी इंटर की पढ़ाई कर रही हैं. बेटा 12 साल का है, जो पांचवीं कक्षा में पढ़ता है.

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लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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