रांची. झारखंड हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मेसर्स जील इंडिया केमिकल्स, रांची के प्रोपराइटर अजय जालान की ओर से दायर याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट ने उन्हें राहत देने से इनकार करते हुए निचली अदालत के उस आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया, जिसमें डिस्चार्ज पिटीशन खारिज करने के साथ उनके खिलाफ आरोप गठित किये गये थे.
अजय जालान ने पीएमएलए कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. 12 अगस्त 2026 को मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनी थीं. इसके बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था. मामले में प्रवर्तन निदेशालय की ओर से वरीय अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरभ कुमार ने पक्ष रखा.
मेकॉन के अधिकारी से जुड़ा है मामला
मामला मेकॉन के तत्कालीन सीनियर मैनेजर मेटालर्जिकल विंग यूएन मंडल से जुड़ा है. सीबीआई ने 30 अक्टूबर 2017 को मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी. सीबीआई की जांच के बाद अजय जालान समेत अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किये जाने का उल्लेख हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में है.
जांच एजेंसियों के अनुसार, यूएन मंडल ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए शिव मशीन टूल, चेन्नई और मेसर्स जील इंडिया केमिकल्स, रांची को कार्यादेश दिलाने में मदद की थी. आरोप है कि इसके एवज में करीब 1.65 करोड़ रुपये की रिश्वत ली गयी थी. सीबीआई की प्राथमिकी के आधार पर बाद में प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत ईसीआईआर दर्ज की.
हाईकोर्ट के समक्ष अजय जालान ने पीएमएलए कोर्ट द्वारा उनकी डिस्चार्ज पिटीशन खारिज किये जाने और आरोप गठित किये जाने के आदेश को चुनौती दी थी. अब हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी है.
