रांची. झारखंड हाइकोर्ट ने मरकच्चो में जमीन के मालिकाना हक से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए संबंधित रैयती जमीन पर पीसीसी सड़क निर्माण पर रोक लगा दी है. जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने आइए याचिका को स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि मौजा मरकच्चो स्थित संबंधित जमीन पर यथास्थिति बनाये रखी जाये और अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार का पीसीसी सड़क निर्माण नहीं किया जाये. मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी.
मामला मौजा मरकच्चो के थाना नंबर 141, खाता नंबर 1818 और प्लॉट नंबर 620 की 4.20 एकड़ जमीन से जुड़ा है. याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रवि कुमार और अधिवक्ता राजीव कुमार पांडेय ने अदालत में पक्ष रखा.
टाइटल सूट में याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला होने का दावा
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित जमीन के मालिकाना हक को लेकर टाइटल सूट संख्या 1/1980 दायर किया गया था. इसमें जमीन का टाइटल याचिकाकर्ताओं के पूर्वज के पक्ष में घोषित किये जाने की बात कही गयी. याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इसके बावजूद संबंधित अधिकारी बिना मुआवजा दिये जमीन पर पीसीसी सड़क निर्माण की तैयारी कर रहे हैं.
अदालत को यह भी बताया गया कि संबंधित जमीन को गलत तरीके से गैरमजरुआ के रूप में दर्ज कर दिया गया है. याचिकाकर्ताओं के अनुसार, पूर्व अदालती फैसले और राजस्व रिकॉर्ड में उनके नाम दर्ज होने के आधार पर वे जमीन के मुआवजे के हकदार हैं. संबंधित जमीन के रजिस्टर-टू में भी उनके नाम दर्ज होने का दावा किया गया.
बिना मुआवजे के निर्माण का विरोध
याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि संबंधित जमीन पर जिला योजना के तहत सड़क निर्माण कराया जा रहा है. यदि सरकार या संबंधित विभाग जमीन का इस्तेमाल सड़क निर्माण के लिए करना चाहता है, तो पहले कानून के अनुसार भू-अर्जन की प्रक्रिया पूरी कर मुआवजा दिया जाना चाहिए. उनका कहना था कि बिना भू-अर्जन और मुआवजे के रैयती जमीन पर निर्माण संविधान के अनुच्छेद 300ए के तहत संपत्ति के अधिकार से जुड़े प्रावधानों का उल्लंघन है.
याचिकाकर्ताओं ने यह भी अदालत के समक्ष रखा कि सरकार का दावा पूर्व में टाइटल अपील में खारिज हो चुका है. मामले में प्रार्थी दामोदर प्रसाद कुशवाहा व अन्य की ओर से झारखंड हाइकोर्ट में याचिका संख्या 5299/2025 दायर की गयी है. अदालत के अंतरिम आदेश के बाद अब संबंधित जमीन पर अगली सुनवाई तक पीसीसी सड़क निर्माण नहीं किया जा सकेगा.
