सरकारी स्कूलों की 12 लाख छात्राओं को फ्री में मिलेगा सेनेटरी पैड, तैयारी में हेमंत सोरेन सरकार

Free Sanitary Pad: हेमंत सोरेन सरकार सरकारी स्कूलों की 12 से 13 लाख छात्राओं को नि:शुल्क सेनेटरी पैड देने की योजना बना रही है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बजट प्रावधान और वितरण व्यवस्था पर काम शुरू हो गया है. योजना अगले शैक्षणिक सत्र से लागू हो सकती है. नीचे पूरी खबर पढ़ें.

रांची से सुनील झा की रिपोर्ट

Free Sanitary Pad: झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं को नि:शुल्क सेनेटरी पैड देने की तैयारी कर रही है. इस योजना से राज्य की लगभग 12 से 13 लाख छात्राओं को लाभ मिलने की संभावना है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम उठाने शुरू कर दिये हैं. इसके लिए नयी योजना लाने के साथ बजट में राशि का प्रावधान करने की प्रक्रिया जारी है.

स्कूली शिक्षा और वित्त विभाग में अधिकारियों की चर्चा

इसे लेकर स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग तथा वित्त विभाग के अधिकारियों के बीच चर्चा हुई है. जिसमें सेनेटरी पैड की खरीदारी, वितरण व्यवस्था, गुणवत्ता और अन्य आवश्यक पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया. सरकार सेनेटरी पैड वितरण कार्यक्रम के लिए यूनिसेफ से सहयोग लेने पर भी विचार कर रही है. यूनिसेफ पहले से ही माहवारी स्वच्छता को लेकर कार्यक्रम संचालित करता है, जिसका लाभ इस योजना को प्रभावी बनाने में लिया जा सकता है. इसके साथ ही, देश के अन्य राज्यों के स्कूलों में सेनेटरी पैड वितरण की व्यवस्था और कार्यप्रणाली की जानकारी भी जुटायी जा रही है. जिससे कि राज्य में इसे बेहतर ढंग से लागू किया जा सके. योजना को अगले शैक्षणिक सत्र से लागू करने की तैयारी है. कक्षा छह से 12वीं तक की छात्राओं को प्रतिमाह पांच से छह पैड दिये जा सकते हैं.

फिलहाल सिर्फ कस्तूरबा में मिल रहा सैनिटरी पैड

झारखंड के सरकारी स्कूलों में फिलहाल छात्राओं को सेनेटरी पैड देने की कोई व्यापक योजना संचालित नहीं है. केवल राज्य के 203 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्राओं को यह सुविधा दी जाती है. इसके अलावा अन्य सरकारी स्कूलों में सेनेटरी पैड वितरण की कोई उचित व्यवस्था नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट दे चुका है आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया है कि वह अपने स्कूलों में छात्राओं को नि:शुल्क सेनेटरी पैड दिलायें. साथ ही, राज्यों से तीन महीने में इस संबंध में किये गये कार्यों की रिपोर्ट भी मांगी है. राज्यों को इस संबंध में किये गये कार्य की जानकारी देनी होगी.

इसे भी पढ़ें: रांची-टोरी लाइन के सवारियों के लिए खुशखबरी, 15 मार्च से फिर दौड़ेंगी ट्रेन

इस पहल से मिलेंगे कई लाभ

  • किशोरियों की स्वास्थ्य व स्वच्छता में सुधार.
  • मासिक धर्म के दौरान संक्रमण का खतरा कम होता है.
  • पीरियड्स के कारण स्कूल से अनुपस्थिति घटती है.
  • ड्रॉप-आउट रेट कम करने में मदद मिलती है.
  • आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की छात्राओं को सहायता मिलती है.
  • किशोरियों में मासिक धर्म जागरूकता बढ़ती है.

इसे भी पढ़ें: झारखंड में 22 वर्षों में 9737 करोड़ के खर्च हिसाब गायब, 8000 करोड़ के ऑडिट पर आपत्ति

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >