राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए जिले से दो शिक्षकाें का नाम भेजा गया राज्य मुख्यालय

जामताड़ा. प्राथमिक स्कूल से लेकर प्लस टू स्कूलों के शिक्षकों ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए ऑनलाइन आवेदन में दिलचस्पी नहीं दिखाई.

विभाग को तीन शिक्षकों का भेजना था नाम, मात्र दो ने ही किया है आवेदन मिहिजाम प्लस टू विद्यालय के शिक्षक डॉ अरुण कुमार वर्मा व डीएवी के प्राचार्य डॉ विजय कुमार का नाम है शामिल फोटो – 19 डॉ अरूण कुमार वर्मा, 20 डॉ विजय कुमार संवाददाता, जामताड़ा प्राथमिक स्कूल से लेकर प्लस टू स्कूलों के शिक्षकों ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए ऑनलाइन आवेदन में दिलचस्पी नहीं दिखाई. निर्धारित अंतिम अवधि समाप्ति तक कुल दो शिक्षकों ने ही आवेदन किया. सरकारी स्कूलों में कार्यरत करीब 1600 शिक्षक, शिक्षिकाओं में से मात्र एक शिक्षकों ने आवेदन किया, जबकि एक निजी स्कूल के शिक्षक ने आवेदन किया है. जिले के मिहिजाम प्लस टू स्कूल के हिंदी शिक्षक डॉ अरुण कुमार वर्मा और डीएवी पब्लिक स्कूल जामताड़ा के प्राचार्य डॉ विजय कुमार का नाम राज्य मुख्यालय को भेजा गया है. जानकारी के अनुसार, उत्कृष्ट शिक्षकों की खोज के लिए जामताड़ा जिले को लगभग 25 दिनों का समय मिला. वक्त था शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाने का, जिसके लिए कम से कम तीन शिक्षकों का चयन कर राज्य को उपलब्ध कराना था. इसमें मात्र दो शिक्षकों ने आवेदन उक्त पुरस्कार के लिए जिला को उपलब्ध कराया. उत्कृष्ट शिक्षकों के चयन के लिए गाइडलाइन राष्ट्रीय स्तर से जारी की गयी थी. राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए जिन दो शिक्षकों ने अपना आवेदन किया उनमें से एक डीएवी के प्राचार्य डॉ विजय कुमार और दूसरा आर के प्लस टू उच्च विद्यालय मिहिजाम के हिंदी के शिक्षक डॉ अरुण कुमार वर्मा हैं. मात्र दो ही शिक्षकों ने आवेदन किया, इन दोनों शिक्षकों को जिलास्तर पर चयन कर राज्य को उपलब्ध कराया गया है. यदि इन शिक्षकों का चयन राज्य स्तर पर होता है तो राष्ट्रीय स्तर पर नाम भेजा जायेगा, ताकि 5 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार सम्मान राष्ट्रपति से मिल सके. डॉ अरुण कुमार वर्मा जो हिंदी के शिक्षक के साथ हिंदी के रचनात्मक कार्यों में दक्ष माने जाते हैं. इनके द्वारा लिखित रचना कई देशों में प्रस्तुत करने का अवसर मिला है. ज्ञातव्य हो कि डॉ वर्मा तीन वर्षों से जिलास्तरीय कमेटी से चयनित होते आ रहे हैं. बावजूद राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए सफल नहीं हो पा रहे हैं. आवश्यकता है कि विभागीय स्तर पर ऐसे पुरस्कार के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण, रचनात्मक कार्यों के लिए गाइडलाइन और समय-समय पर उसका मूल्यांकन किया जाए, ताकि जामताड़ा जिले से अधिक से अधिक शिक्षकों को इसके लिए तैयार किया जा सके. जिला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जा सके. बता दें कि जामताड़ा जिले से पूर्व में भी दो शिक्षक सुनील कुमार बास्की व सुशील मरांडी को राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजा जा चुका है.

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Published by: Umesh kumar

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