ईश्वर की कृपा पाने के लिए अहंकार से रहें दूर : कथावाचक

कुंडहित. सिंहवाहिनी मंदिर परिसर में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा श्रद्धा और भक्ति के साथ जारी है.

– श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन श्रीकृष्ण बाल लीलाओं का किया वर्णन प्रतिनिधि, कुंडहित. सिंहवाहिनी मंदिर परिसर में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा श्रद्धा और भक्ति के साथ जारी है. कथा के पांचवें दिन शनिवार को वृंदावन धाम से पधारे बाल कथावाचक कौस्तभ बल्लभ शास्त्री महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न बाल लीलाओं का वर्णन किया. इसमें श्रीकृष्ण की माखन चोरी लीला, कालिया दमन लीला, गिरिराज गोवर्धन लीला, वस्त्रहरण लीला व दामोदर लीला शामिल है. कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण के श्रवण से मनुष्य के दैहिक, दैविक एवं भौतिक तीनों प्रकार के तापों का शमन होता है. उन्होंने बताया कि अहंकार से दूर रहकर ही ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है. बताया कि भगवान ने अपने बाल्यावस्था में ही अनेकों अद्भुत लीलाएं की. मात्र छह दिन की अवस्था में ही उन्होंने पूतना का उद्धार किया. तीन माह की अवस्था में करवट उत्सव के दौरान शकटासुर का वध कर भक्तों को संकट से मुक्ति दिलाई. कहा कि श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीलाएं दिव्य है और उसका आध्यात्मिक महत्व है. गोकुल में भगवान ने अनेकों बाल लीलाएं करते हुए दुष्टों का संहार किया और भक्तों का कल्याण किया. माखन चोरी प्रसंग में उन्होंने कहा कि गोपियों के सच्चे भाव को स्वीकार करते हुए भगवान स्वयं उनके घर जाकर दर्शन देते थे, जहां सच्ची भक्ति और भावना होती है, वहां भगवान अवश्य प्रकट होते हैं. गिरिराज गोवर्धन लीला के संदर्भ में उन्होंने कहा कि देवराज इंद्र के अहंकार को समाप्त करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पूजा का महत्व स्थापित किया. इस लीला के माध्यम से भगवान ने प्रकृति संरक्षण का भी संदेश दिया. मौके पर मधुर भजन से लोग झूम उठे.

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By JIYARAM MURMU

JIYARAM MURMU is a contributor at Prabhat Khabar.

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