Jharkhand Cyber Crime News, जामताड़ा (उमेश कुमार की रिपोर्ट): झारखंड के जामताड़ा जिले की पुलिस ने साइबर ठगों के खिलाफ एक बार फिर बड़ा क्रैकडाउन किया है. पुलिस ने करमाटांड़ थाना क्षेत्र के विभिन्न गांवों में योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी कर तीन शातिर साइबर अपराधियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार किए गए इन ठगों के पास से पुलिस ने अपराध में इस्तेमाल किए जा रहे 10 मोबाइल फोन और 10 सिम कार्ड भी बरामद किए हैं. इस बड़ी सफलता को लेकर साइबर डीएसपी अमित रविदास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विस्तृत जानकारी साझा की है.
गुप्त सूचना पर तीन गांवों में पुलिस की विशेष छापेमारी
साइबर डीएसपी ने बताया कि पुलिस को करमाटांड़ इलाके में कुछ अपराधियों द्वारा बड़े पैमाने पर साइबर ठगी को अंजाम दिए जाने की गुप्त और सटीक सूचना मिली थी. इसके बाद साइबर अपराध थाना की टीम ने थाना प्रभारी राजेश मंडल एवं पुलिस निरीक्षक चंद्रमणि भारती के नेतृत्व में एक विशेष छापेमारी टीम का गठन किया. इस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए करमाटांड़ थाना क्षेत्र के पिंडारी, सकलपुर एवं तिलैया (केंदुआटांड़) गांवों में एक साथ दबिश दी. इस छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से तीन आरोपियों को डिजिटल डकैती करते हुए रंगे हाथ दबोच लिया. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पिंडारी (दास टोला) निवासी प्रीतम दास, विनोद दास और बरमुंडी निवासी मोहम्मद तूफान उर्फ तूफान अंसारी के रूप में की गई है.
क्रेडिट-डेबिट कार्ड ब्लॉक होने का झांसा देकर करते थे ठगी
पुलिस पूछताछ में आरोपियों के ठगी करने के तौर-तरीकों का बड़ा खुलासा हुआ है. ये शातिर अपराधी मुख्य रूप से एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) और एसबीआई (SBI) समेत देश के अन्य प्रतिष्ठित बैंकों के क्रेडिट और डेबिट कार्ड धारकों को अपना निशाना बनाते थे. आरोपी खुद को बैंक अधिकारी बताकर ग्राहकों को फोन करते थे और उनका कार्ड बंद होने या नया कार्ड जारी करने का झांसा देकर जाल में फंसाते थे. जैसे ही ग्राहक इनके झांसे में आता था, ये उससे पैन नंबर, सीवीवी और ओटीपी जैसी गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल कर लेते थे और फिर ई-वॉलेट के माध्यम से पलक झपकते ही खाते से पैसे उड़ा देते थे. पुलिस के अनुसार, इन ठगों का जाल देश के कई राज्यों में फैला हुआ था.
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प्राथमिकी दर्ज, पुलिस खंगाल रही नेटवर्क
जामताड़ा पुलिस ने इस बार पकड़े गए अपराधियों के खिलाफ नए और बेहद सख्त कानूनों के तहत शिकंजा कसा है. इस पूरे मामले को लेकर साइबर अपराध थाना में कांड संख्या 31/2026 दर्ज किया गया है. पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023, आईटी एक्ट (IT Act) और नए टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023 की विभिन्न संगीन धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है. फिलहाल पुलिस इन आरोपियों को रिमांड पर लेकर कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि इनके अंतरराज्यीय नेटवर्क, बैंक खातों और गिरोह में शामिल अन्य सहयोगियों का पता लगाया जा सके.
1930 पर तुरंत करें शिकायत
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान साइबर डीएसपी अमित रविदास ने आम नागरिकों और बैंक उपभोक्ताओं से सतर्क रहने की पुरजोर अपील की है. उन्होंने कहा कि कोई भी बैंक कभी भी फोन पर अपने ग्राहकों से गोपनीय दस्तावेज या पासवर्ड नहीं मांगता है. इसलिए किसी भी अनजान या संदेहास्पद कॉल पर अपने बैंक खाते, एटीएम पिन, यूपीआई आईडी, ओटीपी अथवा आधार जैसी कोई भी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें. यदि कोई व्यक्ति अनजाने में साइबर ठगी का शिकार हो जाता है, तो वह बिना समय गंवाए तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर अपनी शिकायत दर्ज कराए, ताकि समय रहते ठगी गई रकम को होल्ड कराया जा सके.
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