जामताड़ा: जिले में कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई अब केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगी. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्चा रूपरेखा (NCF) 2023 के तहत विद्यार्थियों को पूर्व व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ने की पहल शुरू की गयी है. इसके तहत जिले के सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी माध्यमिक विद्यालयों में बैगलेस डे एवं कौशल बोध पाठ्यचर्चा का अनिवार्य रूप से संचालन किया जायेगा.
पढ़ाई के साथ व्यावहारिक ज्ञान और कौशल पर जोर
जिला शिक्षा पदाधिकारी सह जिला कार्यक्रम पदाधिकारी की ओर से सभी विद्यालयों के प्रधानाध्यापक और प्रभारी प्रधानाध्यापकों को आवश्यक निर्देश जारी किये गये हैं.
विभाग के अनुसार विद्यार्थियों को अकादमिक विषयों के साथ व्यावहारिक ज्ञान और जीवन कौशल से जोड़ना जरूरी है. बैगलेस डे के दौरान विभिन्न गतिविधियों और कौशल आधारित कार्यों के माध्यम से बच्चों को सीखने का अवसर मिलेगा.
इस पहल से विद्यार्थियों में सामाजिक एवं जीवन कौशल के साथ मूलभूत व्यावसायिक कौशल विकसित करने पर जोर दिया जायेगा.
बच्चों को अपनी रुचि पहचानने में मिलेगी मदद
बैगलेस डे और कौशल बोध कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी रुचि और अभिरुचि पहचानने में मदद मिलेगी. बच्चों को व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराने के साथ उनकी रचनात्मकता और आत्मविश्वास बढ़ाने का प्रयास किया जायेगा.
विभाग का मानना है कि गतिविधि आधारित सीखने से बच्चों में समस्या समाधान की क्षमता विकसित होगी और वे भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे.
कक्षा 6 से 8 के सभी विद्यार्थियों के लिए होगा संचालन
विभाग ने जिले के कक्षा छह से आठ तक के छात्र-छात्राओं के लिए बैगलेस डे एवं कौशल बोध पाठ्यचर्चा का संचालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है.
कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी सभी प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी, प्रबंधक और प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारियों को दी गयी है. विद्यालय स्तर पर प्रधानाध्यापक एवं प्रभारी प्रधानाध्यापक इसकी व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे.
किताबों के बाहर भी सीखेंगे बच्चे
नई व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों को केवल पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा देने के बजाय उन्हें वास्तविक जीवन से जोड़ना है. विभिन्न कौशल आधारित गतिविधियों के जरिए विद्यार्थी सीखने के साथ-साथ काम करने और समस्याओं का समाधान करने की प्रक्रिया को भी समझेंगे.
इससे बच्चों में आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और व्यावहारिक समझ विकसित करने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है.
क्या कहते हैं पदाधिकारी
जानकारी देते हुए डीइओ चार्ल्स हेंब्रम ने कहा कि“बैगलेस डे एवं कौशल बोध से विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक ज्ञान और जीवनोपयोगी कौशल सीखने का अवसर मिलेगा. इसका उद्देश्य बच्चों की रुचि के अनुरूप कौशल विकसित कर उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है.”
