बड़ी समस्या . चार महीने से सहकारिता सहायक निबंधन पदाधिकारी का पद खाली
जिले में बने 25 बीज ग्राम का नहीं हो सका है निबंधन
विभाग को नहीं पता कब प्रतिनियुक्त होंगे पदाधिकारी
जामताड़ा : जिला सहकारिता विभाग में पिछले चार महीने से सहायक निबंधन पदाधिकारी नहीं हैं. इससे जहां एक ओर कृषि विभाग का काम पूरी तरह प्रभावित हो रहा है वहीं अन्य कई कार्य भी ठप हैं. यहां पदाधिकारी कब आयेंगे इसका विभाग को तो अंदाजा तक नहीं है. आलाधिकारी भी इससे पूरी तरह अनभिज्ञ हैं. जाे भी काम हो रहा है या तो पेंडिंग हो रहा या फिर किसी तरह निबटाया जा रहा है. बता दें कि जामताड़ा सहकारिता विभाग में सहायक निबंधन पदाधिकारी के रूप में अजय कुमार श्रीवास्तव पदस्थापित थे. उनका तबादला हो गया. लेकिन उनकी जगह पर विभाग ने किसी को नहीं भेजा.
जिस कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है. विभाग का काम पिछले चार महीनों से ढुलमुल तरीके से हो रहा है. इसका सीधा असर कृषि विभाग पर हो रहा है. क्योंकि कृषि विभाग में बीज ग्राम का अबतक निबंधन नहीं हो पाया है. बीज ग्राम का निबंधन करने का काम इसी निबंधन पदाधिकारी के जिम्मे है. इस वजह से सरकार के महत्वाकांक्षी योजना जामताड़ा जिला में चालू नहीं हो पाया है.
कृषि विभाग सहित अन्य विभागों का काम हो रहा प्रभावित
25 बीज ग्राम प्रभावित
सरकार ने जामताड़ा जिले में कृषि विभाग व आत्मा द्वारा खरीफ धान के लिए 20 व दलहन के लिए पांच बीज ग्राम बनाये गये हैं. नियम के मुताबिक बीज ग्राम की स्थापना के साथ ही बीज ग्राम का निबंधन होना जरूरी है. यह काम को-ऑपरेटिव सोसाइटी एक्ट के तहत हाेता है. ऐसे में कुल 25 बीज ग्राम प्रभावित हो रहे हैं.
क्या होगा नुकसान
सरकार ने खरीफ फसल व दलहन के लिए जो भी बीज ग्राम बनाये हैं. उनमें सबसे बड़ी समस्या यह हो रही है कि खरीफ की फसल तैयार है. अब जब बीज ग्राम का निबंधन नहीं हुआ है तो लोगों को फसल बीमा का लाभ लेने में भी परेशानी होगी. लेटलतीफी के कारण शायद उन्हें इसका लाभ भी ना मिल पाये. उधर दलहन की फसल लगाने के लिए सरकार प्रेरित कर रही है. यह फसल कम समय में होता है. यदि अभी निबंधन पर ध्यान नहीं दिया गया तो दलहन फसल लगाने वालों को भी परेशानी होगी.
क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक
आत्मा के वरीय कृषि वैज्ञानिक डॉ संजीव कुमार ने कहा कि बीज ग्राम का सोसाइटी एक्ट के तहत निबंधन होता है, जो सहायक निबंधन पदाधिकारी के नहीं रहने से अभीतक निबंधन नहीं हो पाया है. इस कारण सरकार द्वारा निर्देशित कई योजनाओं का लाभ लेने में किसानों को परेशानी हो सकती है.
