कार्रवाई . धनबाद के टुंडी समेत कई अन्य गैंग सक्रिय, निरसा में मिली पुलिस को बड़ी उपलब्धि
धनबाद : पुलिस की स्पेशल टीम ने निरसा थाना क्षेत्र के गोपलगांज व पिठकियारी गांव से सात साइबर क्रिमिनलों को दबोची है. इसके अलावा पुलिस गिरफ्त में आये क्रिमिनलों का सरगना सह ट्रेनर बजरंग दास (जामताड़ा, पांडेडीह बस स्टैंड के समीप) भी शामिल है. अन्य युवकों में निरसा थाना क्षेत्र के राजा दास (पिता तारापदो रविदास, गोपालगंज ), करण रविदास (पिता मोना रविदास, गोपालगंज निरसा), अभिजीत रविदास ( पिता विनोद रविदास), बाबुल रविदास (पेशर नवीन रविदास), विकास रविदास (पिता उमेश रविदास), तूफान रविदास (पिता मंगर रविदास), आर्यन रविदास (पिता सदानंद रविदास) सभा पीठाकियारी के रहने वाले हैं.
एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा ने सोमवार को पुलिस कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में दी. मौके पर डीएसपी मुकेश कुमार महतो, इंस्पेक्टर शैलेंद्र कुमार सिंह, संजय कुमार, निरसा थानेदार रामेश्वर उपाध्याय, बरवाअड्डा थानेदार प्रदीप चौधरी व टेक्नीकल सेल के आरक्षी राधा कुमार के साथ एसओजी टीम के पुलिसकर्मी मौजूद थे. पुलिस कप्तान ने बताया कि इंदौर, बंगलोर, गवालियर, मुबंई, पुणे समेत कई जगहों से फोन आ रहे थे. फोन करने वालों का कहना था कि कॉल कर एटीएम पिन पूछकर बैंक खाते से राशि निकाली ली गयी है.
संबधित फोन नंबर का ट्रू कॉलर में धनबाद का पता बता रहा है. लोगों की शिकायत के आलोक में डीएसपी मुकेश कुमार महतो के साथ टेक्नीकल सेल के राधा कुमार के साथ इंस्पेक्टर व थानेदारों की टीम गठित की गयी. टीम ने फोन कॉल समेत अन्य डिटेल के आधार पर अपराधियों तक पहुंची.
13 एंड्रॉयड मोबाइल, 16 सिम कार्ड, बीओआइ का बैंक खाता बरामद
एसएसपी ने बताया कि पकड़े गये लोगों के पास 13 एंड्रॉयड मोबाइल, 16 सिम कार्ड, बीओआइ का बैंक खाता जिसमें रकम ट्रांसफर कर निकासी की गयी है. खाता चंदन रविदास पिता बसंत रविदास पिठाकियारी का रहने वाला के नाम है. चंदन की खोज में पुलिस उसके घर दबिश दी तो वह नहीं मिला.
खाते में जनवरी से लेकर अभी तक 15 से 20 लाख रुपये की लेन-देन है. पुलिस गिरफ्त में आया आर्यन निजी स्कूल का शिक्षक है. पूछताछ में इन लोगों ने पुलिस को बताया है कि गैंग में महिला व नाबालिग को का भी उपयोग कर लोगों के फंसाने के लिए करते हैं. गैंग से जुड़े अन्य लोग टुंडी के चरकखुर्द समेत अन्य जगहों पर भी सक्रिय है. जामताड़ा का बलराम समेत अन्य निरसा आकर युवकों को ट्रेनिंग देता था. कारोबार करने वालों के अन्य बैंक खातों का भी पता लगाया जा रहा है. ठगी की राशि करोड़ तक भी पहुंच सकती है.
कैसे करता है ठगी
लोगों को फोन कर बैंक के मुबंई ऑफिस, आरबीआइ व एटीएम सेल से कॉल बताया जाता है. एटीएम लॉक होने, एक्पायर होने व खाता बंद होने की बात कह एटीएम का नंबर व पिन कोड ले लेते हैं. नंबर नहीं बताये जाने पर खाता या एटीएम बंद हो जाने की बात कही जाती है. जैसे ही एटीएम का पिन व खाता विवरणी मिलता है चंद मिनटों के अंदर राशि दूसरे खाते में ट्रांसफर करा ली जाती है. संबंधित खाते से राशि फिर दूसरे खाते में भेजी जाती है. राशि तत्काल एटीएम से निकासी कर ली जाती है या ऑन लाइन खरीददारी कर ली जाती है. जिस खाते में राशि ट्रांसफर की जाती है कि वह भी किसी दूसरे का होता है.
