Jamshedpur news. धर्म-जाति का जहर निकालने के लिए युवाओं को अपनी सोच बदलनी होगी : प्रो जगमोहन सिंह

टेल्को मस्जिद कैंपस के मिल्लत हॉल में साझा संवाद व्याख्यान का आयोजन

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टेल्को मस्जिद कैंपस स्थित मिल्लत हॉल में रविवार को साझा संवाद व्याख्यान को संबोधित करते हुए शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह के भांजे प्रोफेसर जगमोहन सिंह ने कहा कि हमें शहीद भगत सिंह से प्रेरित होकर वैज्ञानिक सोच रखनी होगी. जात-पात, धर्म, क्षेत्र का जहर लोगों के मन से निकालने के लिए युवाओं को अपनी सोच में बदलाव लाना होगा. आज देश में भगत सिंह के समय जैसे हालात हो गये हैं. सामाजिक असमानता की खाई बढ़ती जा रही है, इसलिए आज फिर से भगत सिंह जैसे सपूत की जरूरत महसूस की जा रही है.व्याख्यान मौजूदा समय में गणेश शंकर विद्यार्थी और भगत सिंह के विचारों की प्रासंगिकता पर आधारित था. प्रो जगमोहन ने भगत सिंह के जीवन से जुड़े कई अनछुए पहुलओं से अवगत कराया. उन्होंने कहा कि भगत सिंह तथा महात्मा गांधी की विचारधारा अलग-अलग थी, इसके बावजूद दोनों एक-दूसरे का सम्मान करते थे. प्रोफेसर जगमोहन सिंह के अनुसार गणेश शंकर विद्यार्थी अच्छे नेतृत्वकर्ता थे और साजिशकर्ता को फांसी नहीं होती, किंतु उन्हें फांसी दे दी गयी, यदि वे जीवित रहते तो और लोगों को इस राह पर तैयार कर लेते. 25 मार्च को गणेश शंकर विद्यार्थी की इसलिए हत्या कर दी गयी, क्योंकि वह हिंदू-मुस्लिम एकता के बड़े सूत्रधार थे. उनके अनुसार 1925 का साल इसलिए जरूरी है, क्योंकि इसी साल भारतीय नौजवान सभा की स्थापना हुई. भगत सिंह ने विज्ञान पर आधारित समाजवाद का रास्ता दिखाया. 1925 में ही डॉ भीम राव आंबेडकर ने शिक्षा पर जोर दिया तब दक्षिण में पेरियार स्वाभिमान पर गोलबंदी कर रहे थे, वहीं 1925 में आरएसएस की भी स्थापना हुई.प्रोफेसर जगमोहन भगत सिंह ने कहा कि भगत सिंह स्त्री पुरुष समानता के पक्षधर थे, लाहौर में जब उन्होंने यूनियन बनायी, तो उसके 900 मेंबर थे और उसका अध्यक्ष महिला को बनाया. ननकाना साहिब की शहादत और कूका आंदोलन ने भी उनके जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव छोड़ा. वे हर एक विषय पर पुस्तक पढ़ते थे. दूसरों को भी पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित करते थे.

भगत सिंह ने कहा था, जब तक जनता एकत्रित नहीं होगी, तो कैसे लोकतंत्र आ सकता है : ज्यां द्रेंज

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित मनरेगा के जनक ज्यां द्रेज ने भगत सिंह के पार्लियामेंट में बम फेंके जाने की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वे पब्लिक सेफ्टी बिल का इसलिए विरोध किया था क्योंकि जब जनता एकत्रित नहीं हो सकती तो कैसे लोकतंत्र आ सकता है. ज्यां द्रेज ने कहा कि मुक्तिवादी समाजवाद को पूर्ण रूप से स्थापित करने की जरूरत है. उदाहरण के तौर पर मजदूर खुद अपना उद्यम चलाये.

कार्यक्रम का संचालन कुमार विक्रम, अध्यक्षता आइए जौहर व धन्यवाद ज्ञापन कैप्टन अनिल पांडेय ने किया. व्याख्यान में मजदूर नेता हरेंद्र सिंह, चंदेश्वर खां, कुलविंदर सिंह पन्नू, आइएस जौहर, कुलविंदर सिंह, जसवंत सिंह भोमा, मो रियाजुद्दीन, इम्तियाज अहमद, रामदरश सिंह, अब्दुल कादिर, तारिक सिद्दीकी आदि मौजूद थे.

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