झारखंड के इन दो शख्स ने बाघों से जोड़ा नाता, रिश्ता ऐसा कि पहचानने लगे हैं आवाज और भाषा

तारकेश्वर 18 वर्षों से बाघों की देखभाल कर रहे हैं. वे बताते हैं कि यह लगाव एक दिन या एक महीने का नहीं है. वर्षों से बाघों की सेवा करते-करते एक नाता बन गया है.

कहते हैं जानवर गंध पहचानता है, जो उसे मनुष्य के करीब लाता है. बाघ जैसे खतरनाक पशु भी इससे अछूते नहीं हैं. टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क में फिलवक्त एक सफेद नर बाघ कैलाश और उसकी दो बेटी सलोनी व सुनैना हैं. तीनों का लगाव एनिमल सुपरवाइजर तारकेश्वर राम और एनिमल कीपर विनोद शर्मा से इस कदर हो गया है कि वे उनकी आवाज और भाषा पहचानने लगे हैं.

तारकेश्वर 18 वर्षों से बाघों की देखभाल कर रहे हैं. वे बताते हैं कि यह लगाव एक दिन या एक महीने का नहीं है. वर्षों से बाघों की सेवा करते-करते एक नाता बन गया है. वह भी बाघों के हाव-भाव, सुख-दुख को महसूस करते हैं. उनकी दिनचर्या बाधों के इर्द-गिर्द घूमती रहती है, जिससे उन्हें संतान की तरह प्यार करते हैं.

डिस्प्ले एरिया में नर-मादा एक साथ नहीं :

अंदर में चार सेल और एक लेबर रूम है. बीमार पड़ने या डिलीवर के वक्त बाघ को इसमें रखा जाता है. कई बार बाघों के आराम करने के लिए भी इसका उपयोग नर्सरी के तौर पर किया जाता है. विनोद बताते हैं कि डिस्प्ले एरिया छोटा होने के कारण वर्तमान में सुबह नौ से बारह बजे तक कैलाश (ह्वाइट टाइगर) नर्सरी में रहता है. इसके बाद इसे डिस्प्ले एरिया में छोड़ा जाता है. इस दौरान सलोनी और सुनैना नर्सरी में आ जाती है.

विनोद बताते हैं कि कैलाश और उनकी संतानों को अलग इसलिए भी रखा जाता है, ताकि दोनों में क्रॉस न हो जाये. अपने ही बच्चे से क्रॉस होने पर नस्ल के खराब होने का खतरा रहता है. विनोद बताते हैं कि पोटाश के पानी में पैर धोने के बाद ही सेल में दाखिल हुआ जा सकता है. ऐसा करने से इंफेक्शन का खतरा नहीं रहता.

संध्या में भोजन :

तारकेश्वर बताते हैं कि तीनों बाघ को हर संध्या साढ़े चार से साढ़े पांच बजे के बीच भोजन दिया जाता है. कैलाश को नौ किलो और सलोनी व सुनैना को साढ़े सात-साढ़े सात किलो बुफैलो मीट परोसा जाता है. स्वास्थ्य के ख्याल से गर्मी में नर बाघ को एक किलो और मादा को आधा किलो मीट कम दिया जाता है. वे बताते हैं कि भोजन सुबह भी दिया जा सकता है. लेकिन, सुबह खिला देने पर पशु नींद के मारे सो जाते हैं. इससे विजिटर्स जू का आनंद नहीं उठा पाते. शाम में भोजन के बाद पशु रात भर सोते हैं. सुबह साफ-सफाई के बाद डिस्प्ले एरिया में आ जाते हैं.

क्यूरेटर व चिकित्सक को दी जाती है हर तरह की जानकारी

तारकेश्वर बताते हैं, ड्यूटी सुबह साढ़े आठ बजे शुरू होती है. इनक्लोजर या सेल (जिसमें बाघ रहता है) में दो गेट होते हैं. डिस्प्ले एरिया की तरफ के गेट का ताला खोलते हैं. लेकिन, गेट बंद रहता है. दूसरी तरफ से अंदर जाकर स्थिति देखते हैं. जानवर मूवमेंट कर रहा है या नहीं, इसकी सूचना क्यूरेटर और चिकित्सक को देते हैं. हर दिन की डायरी मेंटेन होती है.

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By Prabhat khabar news desk

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