आठ साल से 'डायन' की प्रताड़ना सह रही थी महिला, जान बचाने की लगायी गुहार

जमशेदपुर के परसुडीह में आठ साल से डायन बताकर प्रताड़ित की जा रही महिला को जनप्रतिनिधियों की पहल पर न्याय मिला. आरोपियों ने दोबारा उत्पीड़न न करने का दिया आश्वासन.

वरीय संवाददाता, जमशेदपुर : परसुडीह थाना क्षेत्र की उत्तरी सरजामदा पंचायत के निदिर टोला में एक महिला पेंड्री सांडिल को पिछले आठ वर्षों से ''डायन'' बताकर प्रताड़ित किये जाने का मामला सामने आया है. पीड़िता का आरोप है कि इस दौरान उसे लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया गया. कई बार मारपीट की गयी और जान से मारने तक की धमकियां दी गयीं. वर्षों तक चुपचाप अत्याचार सहने के बाद आखिरकार महिला ने हिम्मत जुटायी और न्याय की उम्मीद में सामाजिक नेतृत्व का दरवाजा खटखटाया. उन्होंने माझी बाबा बाघराय किस्कू, उत्तरी सरजामदा की मुखिया सुमी केराई और जिला परिषद सदस्य कुसुम पूर्ति से संपर्क कर अपनी पीड़ा सुनायी और जान की गुहार लगायी.

जिला परिषद सदस्य कुसुम पूर्ति ने इस गंभीर और अमानवीय मामले को गंभीरता से लिया. विवाद के समाधान के लिए उन्होंने रविवार को दोनों पक्षों की बैठक बुलायी. इसमें कुसुम पूर्ति ने पीड़िता के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार करने वाले परिवारों को कड़ी चेतावनी दी. उन्होंने स्पष्ट कहा कि डायन बताकर प्रताड़ित करना कानूनन अपराध है. भविष्य में यदि पीड़िता के साथ किसी भी प्रकार की हिंसा, धमकी या उत्पीड़न की घटना सामने आयी, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की अनुशंसा की जायेगी. उन्हें जेल की हवा खानी पड़ेगी. इस सख्त रुख का असर यह हुआ कि आरोपी परिवारों ने अपनी गलती स्वीकार की और भविष्य में कोई विवाद या मारपीट न करने का लिखित-मौखिक आश्वासन दिया.

अंधविश्वास छोड़ने की अपील

इस विवाद को सुलझाने के बाद जिला परिषद सदस्य कुसुम पूर्ति ने कहा कि आज के आधुनिक युग में भी हमारे आदिवासी-मूलवासी समाज में डायन प्रथा जैसी कुप्रथाएं और अंधविश्वास जीवित हैं, जो पूरे समाज के लिए एक बदनुमा कोढ़ हैं. यह बेहद शर्मनाक है कि लोग आज भी इस काल्पनिक और झूठी धारणा के प्रभाव में आकर हत्या जैसे जघन्य अपराधों को अंजाम देने से नहीं हिचकते. कुसुम पूर्ति ने समाज के प्रबुद्ध नागरिकों और युवाओं से अपील की कि वे इस तरह अंधविश्वास से खुद को पूरी तरह दूर रखें. विज्ञान और तकनीक के इस दौर में डायन-भूत जैसी चीजों का कोई अस्तित्व नहीं है. इस तरह के मिथकों को बढ़ावा देने से समाज का केवल नुकसान होता है और आपसी भाईचारा नष्ट होता है.


प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: Dashmat Soren

Published by: Amleshnandan Sinha

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >