भाषा से पहचान तक... लाको बोदरा ने ‘हो’ समाज के लिए समर्पित कर दिया पूरा जीवन, पढ़ें पूरी खबर

हो समाज के ओत गुरु कोल लाको बोदरा की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया. उन्होंने अपनी मातृभाषा और संस्कृति को पहचान दिलाने के लिए जीवन समर्पित कर दिया. उनकी विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया.

जमशेदपुर : ‘हो’ समाज की भाषा, लिपि और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत आधार देने वाले ओत गुरु कोल लाको बोदरा को उनकी जयंती पर श्रद्धापूर्वक याद किया गया. सीतारामडेरा में आयोजित कार्यक्रम में झामुमो पूर्वी सिंहभूम के जिलाध्यक्ष विक्टर सोरेन और जिला उपाध्यक्ष सागेन पूर्ति ने ओत गुरु की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की. इस दौरान उनके योगदान को याद करते हुए उनकी विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया.

मातृभाषा और संस्कृति को दिलायी पहचान

मौके पर जिलाध्यक्ष विक्टर सोरेन ने कहा - ओत गुरु कोल लाको बोदरा झारखंड की धरती के महान सपूत थे. उन्होंने अपनी मातृभाषा और संस्कृति को पहचान दिलाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया. भाषा, लिपि और संस्कृति के क्षेत्र में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत बना रहेगा. उन्होंने कहा - लाको बोदरा की दूरदृष्टि, संघर्ष और समर्पण ने ‘हो’ समाज की भाषा, वारंग क्षिति लिपि, संस्कृति और पहचान को नई दिशा देने का काम किया. उनकी विरासत समाज को अपनी भाषा और सांस्कृतिक अस्मिता को सहेजने के लिए निरंतर प्रेरित करती है.

आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का लिया संकल्प

जयंती के अवसर पर उपस्थित लोगों ने ओत गुरु की विरासत को संरक्षित करने तथा मातृभाषा, वारंग क्षिति लिपि और संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों तक मजबूती से पहुंचाने का संकल्प लिया. कार्यक्रम के दौरान ओत गुरु कोल लाको बोदरा अमर रहें” और “आदिवासी संस्कृति अमर रहे के नारों के साथ उन्हें जोहार अर्पित किया गया. कार्यक्रम में झामुमो आईटी सेल के संयोजक गोकुल मार्डी, महिला मोर्चा की सदस्याएं और पार्टी के अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे.

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लेखक के बारे में

By दशमत सोरेन

दशमत सोरेन ने रांची विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर किया है. वे 29 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उनकी विशेषज्ञता मुख्य रूप से झारखंड की आदिवासी-मूलवासी राजनीति, स्थानीय समुदायों की भाषा-संस्कृति और यहां के सामाजिक ताना-बाना है. वे वर्ष 2010 से प्रभात खबर के साथ एक ट्राइबल रिपोर्टर के रूप में काम कर रहे हैं.

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