Jamshedpur news. सोनारी थाना में हंगामा कर सकते हैं विपक्ष के 17 लोग, शिकायत पर पुलिस पहुंची

अपदस्थ सत्ता पक्ष के लोगों ने एसएसपी को लिखा पत्र, सीजीपीसी ने घटना की निंदा की

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सीजीपीसी के दबाव में सोनारी गुरुद्वारा के प्रधान पद से इस्तीफा देने के बाद तारा सिंह और उनके समर्थक फिर से होनेवाले चुनाव को लेकर अपनी सक्रियता बनाये हुए हैं. अपदस्थ किये गये सत्ता पक्ष के रविंदर सिंह रवि और सुखविंदर सिंह ने एसएसपी को अंग्रेजी में लिखे पत्र में बताया कि सोनारी गुरुद्वारा के कार्यालय में सात जून को सीजीपीसी ने अज्ञात कारणों से तालाबंदी कर दी है. इस कारण गुरुद्वारा प्रबंधन के कार्य में हर दिन काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. सीजीपीसी ने स्थिति सामान्य होने की शर्त पर कार्यालय का ताला खोलने पर अपनी सहमति व्यक्त की है. एसएसपी को लिखी शिकायत में कहा कि सोनारी की संगत को भय है कि 17 लोगों के नेतृत्व में असामाजिक तत्वों का समूह वहां ताला खोलने या फिर अन्य प्रक्रिया के दौरान हंगामा कर सकता है, इसलिए विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों की उपस्थिति अनिवार्य है. अपदस्थ किये गये सत्ता पक्ष के रविंदर सिंह रवि और सुखविंदर सिंह ने एसएसपी को लिखे पत्र में असामाजिक तत्वों में सोनारी गुरुद्वारा के पूर्व प्रधान गुरदयाल सिंह, बलबीर सिंह, मंजीत सिंह, बलदेव सिंह, सतबीर सिंह, चरण कमल सिंह, सतिंदर पाल सिंह, जगदीप सिंह गिड्डा, उपकार सिंह, कश्मीरा सिंह, सुखदेव सिंह, सुरजीत सिंह, अमरजीत सिंह धंजल, एचएस बेदी, दलजीत सिंह, हरजीत सिंह, यशवंत सिंह का नाम लिखित रूप से प्रदान किया है.

एसएसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सोनारी थाना को सोनारी गुरुद्वारा में विधि-व्यवस्था निर्धारित करने का निर्देश दिया. कुछ ही देर में वहां पुलिस पहुंच गयी. इसकी जानकारी मिलने पर सीजीपीसी के प्रतिनिधि के रूप में सुरजीत सिंह, सुखविंदर सिंह राजू, सुखदेव सिंह बिट्टू व सुरिंदर सिंह शिंदे पहुंचे. उन्होंने पुलिस को गुमराह करने और गुरुद्वारा में बुलाने की कड़ी निंदा की. सुरजीत सिंह ने संगत को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसा कृत्य कर कुछ लोग समाज की खिलाफत करना चाहते हैं. सीजीपीसी जल्द चुनावी प्रक्रिया की घोषणा करेगी, जिसके बाद संगत जिसे चाहे उसे प्रधान चुने.

उल्लेख्यनीय है कि सोनारी गुरुद्वारा के प्रधान रहे तारा सिंह का एक ऑडियो वायरल होने के बाद सीजीपीसी के प्रधान भगवान सिंह के नेतृत्व में पहुंची. इसके बाद उन्होंने वायरल ऑडियो के मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रधान तारा सिंह से इस्तीफा लिखवा लिया. सीजीपीसी ने इस्तीफा पत्र रिसीव करने के बाद गुरुद्वारा में प्रधान के कार्यालय में ताला मार दिया, जिसके कारण कार्यालय अभी भी बंद है.

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