टाटा स्टील के कर्मचारियों के लिए इस साल का बोनस बेहतर रहा है लेकिन अगले साल बोनस की रकम और भी ज्यादा होने की उम्मीद है. इस साल टाटा स्टील के कर्मचारियों को कुल 315 करोड़ रुपये बोनस देने की घोषणा की गयी है. खास बात यह है कि अगले साल कर्मचारियों को इस साल हुए वेज रिवीजन समझौते का भी सीधा लाभ मिलेगा.
वेज रिवीजन का 15 माह का मिलेगा असर
इस साल हुए वेज रिवीजन समझौते के कारण अगले साल बोनस की राशि में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. इस साल के तीन माह का एरियर बोनस की गणना में शामिल होगा, जबकि अगले साल पूरे 12 माह का लाभ मिलेगा. यानी कुल 15 माह का असर बोनस पर पड़ेगा. इसके साथ ही वेज रिवीजन के बाद कर्मचारियों का बेसिक और डीए भी बढ़ गया है. बोनस की गणना इन्हीं बढ़ी हुई राशि के आधार पर होगी. वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनी का उत्पादन और मुनाफा भी बेहतर रहा है. ऐसे में अगले साल कर्मचारियों को बंपर बोनस मिलने की उम्मीद बढ़ गयी है.
2012 से लागू है बोनस का फार्मूला
टाटा स्टील कर्मचारियों के लिए मौजूदा बोनस फार्मूला वर्ष 2012 में तय किया गया था. तत्कालीन यूनियन अध्यक्ष आर. रवि प्रसाद के नेतृत्व में हुए समझौते में कंपनी के प्रॉफिट का 1.5 फीसदी, प्रॉफिटेबिलिटी, प्रोडक्टिविटी और सेफ्टी को बोनस का आधार बनाया गया था. करीब 14 साल से इसी फार्मूले के आधार पर बोनस का निर्धारण किया जा रहा है.
सेफ्टी में 5 करोड़ रुपये शून्य होने से बचा
बोनस फार्मूले में सेफ्टी का भी अहम हिस्सा है. इसके लिए 15 करोड़ रुपये का प्रावधान है. अगर साल भर में कोई दुर्घटना नहीं होती है तो पूरी राशि मिल सकती है. एलटीआईएफआर 0 से 0.2 तक रहने पर 10 करोड़ और 0.2 से 0.4 तक रहने पर 5 करोड़ रुपये मिलते हैं. 0.4 से ऊपर एलटीआईएफआर होने पर सेफ्टी मद की राशि शून्य हो जाती है.
इस साल एलटीआईएफआर 0.39 तक पहुंचा. यानी यह 0.4 की सीमा के बेहद करीब रहा. अगर इसमें 0.1 की और बढ़ोतरी होती तो सेफ्टी मद के 5 करोड़ रुपये भी बोनस से बाहर हो जाते.
उत्पादकता बढ़ने से मिला 10 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ
इस बार बोनस समझौते में उत्पादकता का आंकड़ा भी कर्मचारियों के लिए अहम रहा. टाटा स्टील में बोनस का निर्धारण मुनाफा, बिक्री, स्टील उत्पादकता और सुरक्षा जैसे मानकों के आधार पर होता है. पहले 600 टन प्रति कर्मचारी प्रतिवर्ष की उत्पादकता के आधार पर उत्पादकता मद में 90 करोड़ रुपये बोनस का प्रावधान था.
इस साल कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़कर 675 मीट्रिक टन प्रति कर्मचारी प्रतिवर्ष हो गयी. इसके बाद कंपनी प्रबंधन ने बोनस फार्मूले को संशोधित करते हुए उत्पादकता मद में 10 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जोड़ी. इसका सीधा लाभ कर्मचारियों को बोनस के रूप में मिला.
यूनियन नेतृत्व के अनुसार, कोविड-19 के बाद यह अब तक का दूसरा सबसे अधिक बोनस है. इस साल 315 करोड़ रुपये का बोनस मिलने से कर्मचारियों में उत्साह है, वहीं वेज रिवीजन और कंपनी के बेहतर उत्पादन-मुनाफे को देखते हुए अगले साल बोनस और ज्यादा बढ़ने की उम्मीद जतायी जा रही है.
