जमशेदपुर : जरा सोचिए, रसोई गैस कोई ऐसी चीज तो है नहीं, जो खत्म होने पर पड़ोसी आकर कह दे - अरे, कटोरी में थोड़ी गैस ले जाइयए. जब सिलिंडर ऐन वक्त पर दगा देता है, तब समझ आता है कि आंच सिर्फ चूल्हे पर नहीं, सीधे दिल पर लगती है.
चूल्हे पर गीले बर्तन सुखाने की परंपरा बंद करें
अगर सिलिंडर को लंबा चलाना है, तो गैस जलाने के बाद प्याज-टमाटर ढूंढ़ने की ‘ट्रेन में चढ़कर टिकट काटने’ वाली आदत छोड़िये. सब्जियां पहले काट लें, मसाले सजा लें और गीले बर्तन चूल्हे पर सुखाने की परंपरा बंद करें. फ्रीज की बर्फीली सब्जी को सीधे कढ़ाई में पटकने के बजाय 30 मिनट बाहर हवा खाने दें. वरना बेचारी गैस पहले बर्फ पिघलायेगी, फिर पकायेगी.
खाना हमेशा ढककर पकाएं
खाना हमेशा ढककर पकाएं और सख्त चीजों के लिए प्रेशर कुकर से पक्की दोस्ती कर लें. बर्तन से बाहर निकलती ऊंची लपटें खाने को जल्दी नहीं पकातीं, बस पैसों को हवा में उड़ाती हैं. उबाल आते ही आंच धीमी करें और बर्नर के हिसाब से सही बर्तन चुनें - छोटे बर्नर पर विशाल पतीला रखना यानी हाथी को साइकिल पर बैठाना.अगर लौ पीली या लाल हो, तो समझो बर्नर चीख रहा है - ‘सफाई कर दो, दम घुट रहा है’ दाल-राजमा को सीधे कुकर में झोंकने के बजाय घंटाभर पानी में डुबकी लगवा दें, वे आधे समय में पक जायेंगे.
इन छोटी बातों को जरूर अपनाएं
इन छोटी-छोटी बातों को अपनाकर आप साल में 2 से 3 सिलिंडर आराम से बचा लेंगे. इससे आपके ₹1,800 से ₹2,700 रुपये की सीधी नगद बचत होगी. सिलिंडर के नखरे कम होंगे और जेब भरी रहेगी, तो चेहरे पर मुस्कुराहट अपने आप आ जायेगी.
