Jamshedpur news. सदर अस्पताल : पानी के अभाव में डायलिसिस सेंटर बंद

पांचों बोरिंग फेल, टैंकर के भरोसे अस्पताल परिसर

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सदर अस्पताल परिसर में पानी की समस्या बढ़ती जा रही है. पानी के अभाव में सदर अस्पताल परिसर में चल रहे चार बेड का डायलिसिस सेंटर को मंगलवार से बंद कर दिया गया है. डायलिसिस सेंटर बंद होने से संबंधित सेंटर में नोटिस लगायी गयी है. इसमें बताया गया कि 22 से 26 अप्रैल तक डायलिसिस सेंटर बंद रहेगा. नोटिस में स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है. वहीं अस्पताल के कर्मचारियों के अनुसार पानी की कमी के कारण सेंटर बंद किया गया है, क्योंकि डायलिसिस में अधिक पानी की खपत होती है.

मंगलवार को डायलिसिस सेंटर बंद होने के कारण कई मरीज वापस चले गये. इसमें कई दूसरे जगह जाकर पैसा देकर डायलिसिस कराया. इस सेंटर में अधिकतर गरीब मरीज अपना डायलिसिस कराने के लिए आते हैं. उन लोगों के पास इतना पैसा नहीं होता है कि बाहर से डायलिसिस कराये. डायलिसिस सेंटर के कर्मचारियों के अनुसार इस सेंटर में प्रतिदिन आठ से 10 लोगों का डायलिसिस किया जाता है. इसके बंद होने से वैसे मरीजों की परेशानी बढ़ गयी है. ज्ञात हो कि सदर अस्पताल परिसर में पांच बोरिंग है, जिसमें पानी नहीं निकल रहा है. सामाजिक संस्थाओं व समाजसेवी द्वारा टैंकर से पानी दिया जा रहा है.

जलस्तर नीचे जाने से हो रही परेशानी

गर्मी में सदर अस्पताल के सभी बोरिंग सूखने से मरीजों के इलाज पर संकट गहराने लगा है. किसी तरह टैंकर व अन्य माध्यमों के सहारे अस्पताल को संचालित किया जा रहा है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है. पानी का जलस्तर नीचे चले जाने के कारण सभी बोरिंग सूख गया है. सदर अस्पताल में हुई सभी बोरिंग लगभग 400 से 500 फीट है. सिविल सर्जन डॉक्टर साहिर पाल ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए वरीय अधिकारियों से बातचीत की है, ताकि समस्या का समाधान जल्द से जल्द हो सके. उन्होंने बताया कि बोरिंग सूखने की जानकारी जिले के उपायुक्त को भी दी गयी है. फिलहाल सदर अस्पताल का संचालन टैंकर व सिविल सर्जन कार्यालय में स्थापित बोरिंग के माध्यम से किया जा रहा है. सदर अस्पताल को संचालित करने के लिए रोजाना 50 से 60 हजार लीटर पानी की आवश्यकता होती है.

ओटी व पैथोलॉजी सेंटर भी हो सकते हैं प्रभावित

पानी के अभाव में अस्पताल में चल रहे ओटी व पैथोलॉजी चलाने में परेशानी हो रही है. इसमें साफ पानी की जरूरत होती है, अन्यथा संक्रमण फैलने के साथ-साथ अन्य परेशानी का भी खतरा काफी बढ़ जाता है. चिकित्सकों ने बताया कि अस्पताल को संचालित करने के लिए काफी पानी की जरूरत होती है. वार्ड से लेकर ऑपरेशन थियेटर (ओटी), पैथोलॉजी सेंटर, ओपीडी, कैंटीन सहित सभी जगहों पर पानी की जरूरत होती है. 100 बेड वाले सदर अस्पताल में प्रतिदिन 150 से 200 मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं.

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