धालभूमगढ़ : ग्रामीण इलाकों में दिल की बीमारी से जूझ रहे बच्चों के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम उम्मीद की नई किरण बन रहा है. स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में होने वाली स्वास्थ्य जांच के दौरान हृदय रोग की पहचान होने पर बच्चों को उच्चस्तरीय अस्पतालों में नि:शुल्क इलाज की सुविधा दी जा रही है. प्रखंड के अब तक कई बच्चों को इस योजना का लाभ मिल चुका है. रविवार को चोइरा की 12 वर्षीय पायल मुंडा और घोषदा के दो वर्षीय सारजेन बास्के को हृदय रोग के ऑपरेशन के लिए केरल स्थित अमृता अस्पताल भेजा गया.
बच्चों के साथ माता-पिता का खर्च भी नि:शुल्क
आरबीएसके के चिकित्सक डॉ. शशांक चटर्जी और डॉ. मणिमाला सेन ने बताया कि जरूरत के अनुसार बच्चों का इलाज मुंबई, हैदराबाद और केरल के उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में कराया जाता है. खास बात यह है कि इलाज के साथ बच्चों और उनके माता-पिता के रेल यात्रा, ठहरने और भोजन का खर्च भी नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाता है.
अब तक चार बच्चों की हो चुकी है सर्जरी
आरबीएसके के माध्यम से अब तक चार बच्चों का ऑपरेशन कराया जा चुका है. ओमश्री भुइयां (1.8 वर्ष), अंकित गोप (6 वर्ष), महेश्वर बास्के (7 वर्ष), रेणुका हेंब्रम (3 वर्ष). हृदय रोग से पीड़ित अंजलि टुडू (9 वर्ष), हलदाजुड़ी और विवेक मुंडा (7 वर्ष), हतियापाटा, गुड़ाबांदा को भी ऑपरेशन के लिए भेजा जाना है. स्कूल और आंगनबाड़ी में हुई एक सामान्य स्वास्थ्य जांच ने इन बच्चों के लिए इलाज का रास्ता खोल दिया. अब महंगे ऑपरेशन की चिंता नहीं, बल्कि स्वस्थ भविष्य की उम्मीद लेकर बच्चे बड़े अस्पतालों की ओर बढ़ रहे हैं.
