समय पर जांच और इलाज से मलेरिया पर लगेगी रोक, बुखार को हल्के में न लें : उपायुक्त

जमशेदपुर में मलेरिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से बुखार को हल्के में न लेने और झोलाछाप डॉक्टरों से बचने की अपील की है। सही इलाज ही बचाव है।

वरीय संवाददाता, जमशेदपुर

पूर्वी सिंहभूम जिले में मलेरिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से बुखार को हल्के में न लेने की अपील की है. उपायुक्त राजीव रंजन ने कहा कि समय पर जांच और उपचार से मलेरिया की गंभीर जटिलताओं तथा मृत्यु को काफी हद तक रोका जा सकता है. उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का बुखार होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर मलेरिया की जांच करानी चाहिए. सोमवार को उपायुक्त कार्यालय सभागार में आयोजित प्रेसवार्ता में उपायुक्त ने बताया कि जिले में अब तक मलेरिया से छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई है. इनमें चार मौतें सेरेब्रल मलेरिया तथा दो मिश्रित संक्रमण के कारण हुई हैं. प्रत्येक मृत्यु की चिकित्सकीय समीक्षा करायी जा रही है. जांच में यह बात सामने आयी है कि अधिकांश मरीज गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचे, समय पर सही दवा नहीं ली या झोलाछाप चिकित्सकों के चक्कर में पड़ गये. उपायुक्त ने बताया कि मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में युद्धस्तर पर सर्विलांस, जांच, उपचार, घरों में कीटनाशक छिड़काव और जनजागरुकता अभियान चलाया जा रहा है. प्रशासन का लक्ष्य प्रत्येक संदिग्ध मरीज की पहचान कर 24 घंटे के भीतर उसकी जांच और उपचार सुनिश्चित करना है. उन्होंने कहा कि लगातार जांच और समय पर इलाज के कारण जिले में मलेरिया के मामलों में कमी आ रही है.

उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में मच्छरदानी वितरण के लिए विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है. साथ ही कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से भी मच्छरदानियां वितरित की जा रही हैं. उपायुक्त ने लोगों से घर और आसपास पानी जमा नहीं होने देने, नियमित रूप से मच्छरदानी का उपयोग करने, स्वास्थ्य विभाग के सर्वे में सहयोग करने तथा मच्छरों के प्रजनन स्थलों को समाप्त करने में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की. इस दौरान सिविल सर्जन डॉ साहिर पाल, एसीएमओ डॉ अजय कुमार सिन्हा, जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ मृत्युंजय धाउड़िया, जिला महामारी रोग विशेषज्ञ डॉ असद सहित स्वास्थ्य विभाग के कई पदाधिकारी व कर्मचारी मौजूद थे.

बिना जांच इलाज पड़ रहा भारी: सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ साहिर पाल ने कहा कि एमजीएम और सदर अस्पताल में भर्ती होने वाले अधिकांश गंभीर मरीज पहले सरकारी स्वास्थ्य केंद्र जाने के बजाय झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराते हैं. बिना मलेरिया जांच किए सामान्य बुखार की दवा देकर मरीजों को घर भेज दिया जाता है, जिससे समय पर सही इलाज नहीं मिल पाता और बीमारी गंभीर रूप ले लेती है. उन्होंने बताया कि पोटका क्षेत्र के चार निजी क्लीनिकों को नोटिस जारी किया गया है. साथ ही सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित निजी नर्सिंग होम और क्लीनिकों की जांच करने तथा क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत पंजीकरण नहीं होने पर कार्रवाई करने के निर्देश दिये गये हैं. सिविल सर्जन ने लोगों से अपील की कि वे स्वयं दवा खरीदकर खाने या झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ने के बजाय सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में जाकर नि:शुल्क मलेरिया जांच और दवा का लाभ उठाएं. उन्होंने बताया कि 29 जून से 12 जुलाई 2026 के बीच जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, शहरी स्वास्थ्य केंद्रों और सदर अस्पताल में 1,04,459 लोगों की मलेरिया जांच की गयी. इनमें 1,895 मरीज मलेरिया पॉजिटिव पाये गये, जबकि जिले की मलेरिया पॉजिटिविटी दर 1.96 प्रतिशत दर्ज की गयी है.


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Author: Chandra Shekhar

Published by: Sweta Vaidya

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