इस हाट में खरीदारी करने पहुंच रहे हैं तो संभलकर, कचरे और जर्जर छज्जे से होगा स्वागत

परसुडीह हाट में खरीदारी करना अब खतरे से खाली नहीं है. कचरे के ढेर, दुर्गंध और जर्जर दुकानों के छज्जे गिरने का डर बना रहता है. खरीदारों की सुरक्षा के लिए व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की गई है.

जमशेदपुर: परसुडीह हाट में खरीदारी करने पहुंचने वालों को इन दिनों सामान खरीदने से पहले अपनी सुरक्षा की चिंता करनी पड़ रही है. कहीं कचरे का अंबार और उससे उठती दुर्गंध परेशान कर रही है, तो कहीं जर्जर दुकानों के छज्जे और प्लास्टर गिरने का खतरा मंडरा रहा है. ऊपर से अतिक्रमण और बेतरतीब पार्किंग ने बाजार की सड़कें संकरी कर दी हैं. ऐसे में हर दिन जाम और हादसे की आशंका बनी रहती है.

जर्जर दुकानों की मरम्मत कराने की मांग

हाट की इन्हीं समस्याओं को लेकर पोटका विधानसभा कांग्रेस युवा मोर्चा के अध्यक्ष शुभम झा और ओबीसी मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष चंदन यादव के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने बाजार सचिव से मुलाकात की. प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपकर परसुडीह हाट की सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने, अतिक्रमण हटाने, पार्किंग की व्यवस्था करने और जर्जर दुकानों की मरम्मत कराने की मांग की.

मरम्मत की मांग करते कांग्रेसी.

300 दुकानों वाले हाट में सुविधाएं बदहाल

शुभम झा ने कहा - परसुडीह हाट में रोजाना सैकड़ों लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं, लेकिन बाजार की सफाई व्यवस्था बेहद खराब है. नियमित कचरा उठाव नहीं होने के कारण जगह-जगह कचरे का ढेर लगा रहता है. इससे पूरे बाजार में गंदगी और दुर्गंध का माहौल बना रहता है. उन्होंने बताया - हाट का सार्वजनिक शौचालय भी रखरखाव के अभाव में बदहाल है. दुर्गंध के कारण दुकानदारों और खरीदारों को परेशानी होती है. कांग्रेस नेताओं ने बाजार की नियमित सफाई और कचरा उठाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की.

सिर के ऊपर जर्जर छज्जा, नीचे से गुजरते हैं खरीदार

परसुडीह हाट में सबसे बड़ी चिंता जर्जर दुकानों को लेकर है. कृषि उत्पादन बाजार समिति के अंतर्गत करीब 300 पक्की दुकानें बनी हुई हैं. ये दुकानें समिति की स्ववित्त पोषित योजना के तहत तैयार की गयी थीं. स्थानीय लोगों के अनुसार समुचित रखरखाव नहीं होने के कारण प्रथम तल की कई दुकानें जर्जर हो चुकी हैं. बारिश के दौरान आए दिन दुकानों के छज्जे और प्लास्टर का हिस्सा गिरता रहता है. इससे दुकानदारों के साथ-साथ बाजार में आने वाले खरीदारों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़ा हो गया है.

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लेखक के बारे में

By दशमत सोरेन

दशमत सोरेन ने रांची विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर किया है. वे 29 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उनकी विशेषज्ञता मुख्य रूप से झारखंड की आदिवासी-मूलवासी राजनीति, स्थानीय समुदायों की भाषा-संस्कृति और यहां के सामाजिक ताना-बाना है. वे वर्ष 2010 से प्रभात खबर के साथ एक ट्राइबल रिपोर्टर के रूप में काम कर रहे हैं.

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