परीक्षा देने निकला और बन गया 5 लाख का इनामी, बंगाल STF के हत्थे चढ़ा माओवादी समीर महतो, पत्नी मालती भी गिरफ्तार

पूर्वी सिंहभूम में दशकों तक खौफ का पर्याय रहे 5 लाख के इनामी माओवादी जोनल कमांडर समीर उर्फ मंगल महतो और उसकी पत्नी मालती को पश्चिम बंगाल एसटीएफ ने दबोच लिया है। दोनों पश्चिम बंगाल के सालबनी से पकड़े गए।

पूर्वी सिंहभूम : पूर्वी सिंहभूम और आसपास के इलाकों में वर्षों तक दहशत का पर्याय रहे 5 लाख रुपये के इनामी माओवादी जोनल कमांडर समीर उर्फ मंगल महतो और उसकी पत्नी 2 लाख रुपये की इनामी एरिया कमेटी सदस्य मालती मुर्मू को शनिवार को धर दबोचा गया. बंगाल एसटीएफ ने उन दोनों को अरेस्ट किया है. हालांकि, पुलिस की ओर से अभी तक इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है कि दोनों ने आत्मसमर्पण (Surrender) किया है या एसटीएफ ने उन्हें गिरफ्तार किया है. लेकिन इतना तय है कि उन्हें पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मेदनीपुर जिला अंतर्गत सालबनी थाना क्षेत्र के सरबेड़िया गांव से पकड़ा गया है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मंगल महतो और उसकी पत्नी मालती माओवादियों के शीर्ष पोलित ब्यूरो सदस्य कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी के बेहद करीबी और बॉडीगार्ड रह चुके हैं. वर्ष 2011 में मुठभेड़ के दौरान जब किशनजी मारे गए थे, तब सुचित्रा महतो के अलावा मंगल भी मौके पर मौजूद था और घेराबंदी तोड़कर भाग निकला था. किशनजी के मारे जाने के बाद दोनों बंगाल स्टेट कमेटी के सचिव असीम मंडल उर्फ आकाश के दस्ते में शामिल हो गए थे. असीम के साथ इन्होंने झारखंड-बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में कई नक्सली वारदातों को अंजाम दिया.

वर्दी उतारकर और हथियार छिपाकर गांव में ले रखी थी शरण

सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में असीम मंडल की गिरफ्तारी और जंगल से माओवादी गतिविधियों के कमजोर पड़ने के बाद मंगल और मालती जंगल में ही हथियार छिपाकर और नक्सली वर्दी उतारकर सामान्य नागरिक की तरह निकल भागे थे. दोनों किसी वाहन से सालबनी के सरबेड़िया गांव पहुंचे और दलमा की तराई से पकड़े गए नक्सली मदन महतो के एक रिश्तेदार के घर छिपकर रह रहे थे. हाल ही में गिरफ्तार असीम मंडल से पूछताछ के आधार पर एसटीएफ ने इनके ठिकाने पर छापेमारी की.

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कैसे मंगल और मालती ने ज्वॉइन किया था माओवादी संगठन

करीब 32 वर्षीय मंगल महतो वर्ष 2008 में कूरियर के रूप में माओवादी संगठन से जुड़ा था. वर्ष 2009 में वह 9वीं कक्षा की परीक्षा देने के बहाने घर से निकला और हमेशा के लिए दस्ता जॉइन कर लिया. वहीं, करीब 30 वर्षीय मालती मुर्मू की मां का बचपन में ही निधन हो गया था और पिता मजदूरी करते थे. इसलिए वह महज 15 साल की उम्र में अपने चाचा के घर से निकलकर माओवादी दस्ते में शामिल हो गई थी. बाद में दोनों ने संगठन के भीतर ही 'कॉमरेड मैरिज' (विवाह) कर ली. मंगल एके-47 और मालती इंसास राइफल लेकर चलती थी.

जंगल खंगालकर हथियार और केन बम बरामद करेगी पुलिस

बंगाल पुलिस और एसटीएफ अब असीम मंडल, मंगल महतो और मालती मुर्मू की निशानदेही पर झारखंड-बंगाल सीमा से सटे घने जंगलों में सर्च ऑपरेशन चलाएगी. पुलिस का मुख्य मकसद नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखे गए एके-47, इंसास राइफल, केन बम, बारूद और अन्य विस्फोटक सामग्री को बरामद करना है. हथियारों की बरामदगी के बाद ही पुलिस इस पूरे मामले का आधिकारिक खुलासा कर सकती है.

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लेखक के बारे में

By मो. युनूस परवेज

मो. युनूस परवेज वर्ष 1995 से पत्रकारिता कर रहे हैं. उन्होंने घाटशिला महाविद्यालय और रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक और राजनीतिक विज्ञान ऑनर्स की डिग्री हासिल की है. इनकी राजनीति, अपराध, नक्सलवाद, खेल, शिक्षा और खेती किसानी की खबरों में विशेष रुचि है. डिजिटल जर्नलिज्म में 5 साल का अनुभव है.

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