Jamshedpur news. जमशेदपुर नगर निगम के विस्तारीकरण की योजना निरस्त हो, पेसा व सरना धर्म कोड लागू करे सरकार

उपायुक्त कार्यालय के समक्ष माझी पारगना महाल तोरोप धार दिशोम ने किया पारंपरिक परिधान व औजारों के साथ प्रदर्शन

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माझी पारगना महाल तोरोप धार दिशोम के बैनर तले काफी संख्या में मांझी-बाबा समेत गांव के काफी लोगों ने उपायुक्त कार्यालय पहुंच कर पूर्वी सिंहभूम जिला में प्रस्तावित जमशेदपुर नगर निगम के विस्तारीकरण की योजना को निरस्त करने की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन किया. आदिवासी समाज के उपायुक्त कार्यालय के समक्ष विरोध-प्रदर्शन में माझी परगना महाल, मानकी-मुंडा समाज, भूमिज मुंडा समाज और जमशेदपुर प्रखंड मुखिया संघ के प्रतिनिधियों सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने भाग लिया. प्रदर्शनकारियों ने ढोल-नगाड़ों, पारंपरिक वेशभूषा और बैनरों के साथ अपनी असहमति दर्ज कराई.

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे देश पारगना बाबा बैजू मुर्मू व जुगसलाई तोरोप पारगना बाबा दसमत हांसदा ने मांग करते हए कहा कि पेसा और आदिवासियों के सरना धर्म कोड को जल्द लागू किया जाये. प्रदर्शन के बाद उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति, गृहमंत्री, राज्यपाल व मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा गया. जुगसलाई तोरोप पारगना बाबा दसमत हांसदा ने बातचीत करते हुए कहा कि पूर्वी सिंहभूम जिला पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आता है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243 जेड-सी के अनुसार अनुसूचित क्षेत्रों में नगर पंचायत, नगर पालिका व नगर निगम का गठन असंवैधानिक है, इसलिए जिला में पहले से बने हुए शहरी निकायों को भी रद्द और प्रस्तावित नगर निगम विस्तार योजना को तुरंत निरस्त किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आदिवासी समुदाय आदिकाल से निवास करते हुए आ रहे हैं. इन क्षेत्रों की अपनी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था, धार्मिक व सामाजिक रीति-रिवाज, जल जंगल जमीन का स्वामित्व, न्याय व्यवस्था आदि लागू है, जो भारतीय संविधान में संरक्षित है. श्री सोरेन ने कहा कि इससे सीएनटी एक्ट व पांचवी अनुसूची का उल्लंघन के साथ-साथ हमारे अस्तित्व पहचान के समाप्त हो जाने का भी खतरा है.

तोरोप पारगना बाबा दसमत हांसदा ने झारखंड में पेसा को अविलंब लागू करने के साथ सरना धर्म को अविलंब मान्यता प्रदान करने की मांग की. प्रदर्शन में मुख्य रूप से देश पारगना बाबा बैजू मुर्मू, हरिपोदो मुर्मू, लेदेम किस्कू, दुर्गा चरण मुर्मू, माझी दीपक मुर्मू, रमेश मुर्मू, सुखराम किस्कू, लेदेम मुर्मू, सुशील हांसदा, नवीन मुर्मू, आनंद हांसदा आदि काफी संख्या में समाज के महिला पुरुष पारंपरिक परिधान व पारंपरिक औजार के साथ शामिल हुए.

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