नौकरी छोड़ दो भाइयों ने थामी खेती की राह, अब लाखों की कमाई की उम्मीद, जानें उनकी कहानी

गालूडीह के युवा किसानों ने आधुनिक तकनीक और ड्रिप सिंचाई से खीरे की खेती कर लाखों की कमाई का उदाहरण पेश किया है. जानें कैसे खेती बनी मुनाफे का व्यवसाय.

प्रकाश दास/गालूडीह : खेती को सिर्फ परंपरागत काम मानने के बजाय आधुनिक तकनीक के साथ इसे व्यवसाय का रूप दिया जाए तो इससे अच्छी आमदनी के साथ रोजगार के अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं. गालूडीह थाना क्षेत्र के सीताडांगा गांव निवासी युवा किसान अमित महतो और सुमित महतो ने खीरा की खेती के जरिए इसका उदाहरण पेश किया है. दोनों भाइयों ने एक एकड़ 30 डिसमिल जमीन में वीएनआर कृष किस्म के खीरे की खेती की है.

तीन लाख रुपए की आमदनी होने की उम्मीद

आधुनिक तरीके से की गयी खेती से उन्हें करीब तीन लाख रुपए की आमदनी होने की उम्मीद है. अमित और सुमित ने बताया - खीरे की खेती में ड्रिप टपक सिंचाई पद्धति का इस्तेमाल किया गया है. वहीं, फसल को बेहतर तरीके से तैयार करने के लिए मचान विधि अपनायी गयी है. इससे खेत में पौधों की देखभाल और फल की तुड़ाई में सुविधा हो रही है. किसानों के अनुसार करीब 80 हजार रुपये की लागत से पूरी खेती शुरू की गयी है.

रोजाना 12 से 15 क्विंटल हो रही तुड़ाई

अमित महतो ने बताया कि फसल तैयार होने के बाद अब तक छह बार खीरे की तुड़ाई हो चुकी है. वर्तमान में प्रतिदिन करीब 12 से 15 क्विंटल खीरा खेत से निकल रहा है. खीरे को जमशेदपुर मंडी में भेजा जाता है. यहां करीब 15 से 20 रुपये प्रति किलो की दर से बिक्री हो रही है. किसानों को उम्मीद है कि पूरे सीजन में करीब 300 क्विंटल तक उत्पादन हो सकता है. युवा किसानों के मुताबिक फसल से करीब तीन लाख रुपये तक की कुल आमदनी होने की उम्मीद है. करीब 80 हजार रुपये की लागत के बाद खेती से अच्छी बचत होने की संभावना है. हालांकि मंडी में खीरे के भाव में उतार-चढ़ाव के कारण अंतिम आमदनी बाजार भाव पर निर्भर करेगी.

बीएससी एग्रीकल्चर के बाद भाई के साथ शुरू की खेती

सुमित महतो ने पोखारी स्थित नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय से बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई की है. सुमित को बिहार राज्य में प्लेसमेंट भी मिला लेकिन कृषि की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नौकरी की बजाय अपने भाई अमित महतो के साथ खेती शुरू करने का निर्णय लिया. दोनों भाई अब आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर खेती को व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं. इस खेती से सिर्फ अमित और सुमित को ही आमदनी नहीं हो रही है, बल्कि गांव के करीब छह युवकों को भी काम मिला है. खेत की तैयारी, सिंचाई, मचान की देखभाल, तुड़ाई और खीरे को मंडी तक पहुंचाने के काम में स्थानीय युवक जुड़े हुए हैं. इससे गांव में ही रोजगार का अवसर उपलब्ध हुआ है.

राज्यपाल भी कर चुके हैं सम्मानित

अमित महतो को राज्यपाल डॉ. सीपी राधाकृष्णन द्वारा दो बार सम्मानित किया जा चुका है. युवा किसानों का कहना है कि आधुनिक कृषि तकनीक, सही फसल का चयन और बाजार से सीधा जुड़ाव होने पर खेती को लाभदायक व्यवसाय बनाया जा सकता है. उनका प्रयास है कि खेती के माध्यम से खुद आगे बढ़ने के साथ गांव के अन्य युवाओं को भी रोजगार से जोड़ा जाए. अमित महतो ने कृषि विज्ञान केंद्र दारिसाई से भी कृषि संबंधी प्रशिक्षण प्राप्त किया है. प्रशिक्षण से मिली जानकारी और तकनीकों का उपयोग वे खेती में कर रहे हैं.


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By Prabhat khabar news desk

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