माओवादी नेता किशन की मौत के बाद असीम मंडल ने संभाली थी संगठन की कमान, यहां जानें कैसे एक कॉलेज का छात्र बना नक्सली

दशकों से माओवादी संगठन में सक्रिय असीम मंडल, जिस पर 2.20 करोड़ का इनाम था, गिरफ्तार कर लिया गया है. पश्चिम बंगाल में संगठन की कमान संभालने वाले इस पूर्व छात्र की कहानी बेहद रोचक है. जानिए उसका पूरा सफर.

जमशेदपुर : दशकों तक माओवादी संगठन में सक्रिय रहे और सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बने नक्सली असीम मंडल उर्फ आकाश को गुरुवार को कोलकाता एसटीएफ ने पूर्वी मेदनीपुर के ललाट गांव से गिरफ्तार किया है. असीम मंडल पर 2.20 करोड़ का इनाम था. 2011 में माओवादी नेता किशन की मौत के बाद बंगाल में संगठन की जिम्मेदारी संभालने के बाद से ही असीम मंडल सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर था.

गांव में जारी है सर्च ऑपरेशन

बता दें कि असीम आम ग्रामीण बनकर रह रहा था. वहीं, गांव में अभी भी सर्च ऑपरेशन जारी है. पुलिस को सूचना मिली है कि असीम ने हथियार भी गांव में ही छिपाकर रखा था. पुलिस हथियार बरामद करने के लिए सर्च ऑपरेशन चला रही है.

1980 में कॉलेज का छात्र था असीम

असीम मंडल का माओवादी संगठन से जुड़ाव कोई नया नहीं था. पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोना थाना क्षेत्र के उत्तर फुलचुक का रहने वाला असीम 1980 के दशक में कॉलेज का छात्र था. इसी दौरान वह माओवादी गतिविधियों के संपर्क में आया. धीरे-धीरे वह संगठन में सक्रिय होता गया और बाद में हथियारबंद दस्ते का हिस्सा बन गया.

असीम मंडल (फाइल फोटो).

किशन की मौत के बाद मिली थी बंगाल की जिम्मेदारी

वर्ष 2011 में माओवादी नेता किशन की मौत के बाद असीम मंडल को बंगाल में संगठन की जिम्मेदारी मिली थी. इसके बाद उसकी संगठनात्मक सक्रियता और बढ़ गई. सुरक्षा एजेंसियां लगातार उसकी तलाश में जुटी रहीं. बताया जाता है कि असीम मंडल झारखंड में सक्रिय माओवादी संगठन के कई बड़े नेताओं के संपर्क में रहा था. सुरक्षा बलों के खिलाफ हिंसक गतिविधियों और संगठन के लिए लेवी वसूली से जुड़े मामलों में भी उसका नाम सामने आता रहा.

झारखंड में एक करोड़ व ओडिशा में 1.20 करोड़ का इनाम

असीम मंडल पर झारखंड सरकार की ओर से एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था. वहीं, ओडिशा सरकार ने भी उसके ऊपर 1.20 करोड़ रुपये का इनाम रखा था. इस तरह असीम मंडल पर कुल 2.20 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था. वह लंबे समय से झारखंड और ओडिशा में सुरक्षा एजेंसियों के लिए वांछित माओवादी नेताओं में शामिल रहा. झारखंड में माओवादी संगठन पर सुरक्षा बलों के लगातार अभियान के बीच संगठन के बचे हुए सदस्यों के दूसरे राज्यों में जाने की बात भी सामने आती रही है.

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By साहिल अस्थाना

साहिल अस्थाना पिछले चार वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. पत्रकारिता के दौरान उन्होंने विभिन्न विषयों पर खबरों को कवर करते हुए जमीनी स्तर की रिपोर्टिंग और समाचार लेखन का अनुभव हासिल किया है. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल से बतौर कंटेंट राइटर जुड़े हुए हैं. अपने वर्तमान कार्यक्षेत्र में वह मुख्य रूप से जमशेदपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को कवर करते हैं. समाचारों को सरल, तथ्यपरक और पाठकों के लिए प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है.

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