जमशेदपुर : बढ़ती उम्र, मधुमेह और आधुनिक जीवनशैली के चलते आंखों के पर्दे (रेटिना) से जुड़ी बीमारियां तेजी से पैर पसार रही हैं. इनमें 'मैकुलोपैथी' एक ऐसी गंभीर समस्या है, जो व्यक्ति की केंद्रीय दृष्टि को सीधे प्रभावित करती है. उक्त बातें जमशेदपुर ऑप्थैल्मोलॉजिकल सोसाइटी द्वारा आंखों में होने वाली बीमारी को लेकर साकची स्थित एक होटल में आयोजित सेमिनार में उपस्थित आइरिस सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, रांची के कंसल्टेंट रेटिनल सर्जन एवं मैनेजिंग पार्टनर डॉ. सुभाष कुमार सिंह ने कही.
अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं मैकुलोपैथी के शुरुआती लक्षण
उन्होंने कहा - मैकुलोपैथी के शुरुआती लक्षण अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं, जो बाद में अंधेपन का कारण बन सकते हैं. उन्होंने कहा कि मैकुलोपैथी आंखों के उस हिस्से को प्रभावित करती है जिसे मैकुला कहते हैं. इसी हिस्से से हम बारीक चीजें देखते हैं, किताबें पढ़ते हैं और चेहरे पहचानते हैं. उन्होंने कहा कि अनियंत्रित शुगर, ब्लड प्रेशर और लंबे समय तक धूप या मोबाइल स्क्रीन के संपर्क में रहना इसका मुख्य कारण है. उन्होंने कहा कि 40 वर्ष के बाद नियमित रूप से आंखों की जांच कराएं और हरी पत्तेदार सब्जियां व एंटीऑक्सीडेंट युक्त आहार लें. समय पर जांच ही बीमारी से बचाव का रास्ता है.
रोगी पर पड़ने वाले उपचार संबंधी बोझ कम करने पर दिया जोर
वहीं, सेमिनार में उपस्थित कोलकाता के डॉ अग्रवाल आई हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. कुमार सौरभ ने आधुनिक उपचार पद्धतियों पर प्रकाश डाला. विशेष रूप से बेहतर रोगी परिणाम प्राप्त करने तथा उपचार की आवृत्ति एवं रोगी पर पड़ने वाले उपचार संबंधी बोझ को कम करने पर जोर दिया. इस कार्यक्रम में उपस्थित डॉ. अजय कुमार गुप्ता सचिव, जमशेदपुर ऑप्थैल्मोलॉजिकल सोसाइटी ने कहा कि इस सेमिनार का उद्देश्य नेत्र रोग विशेषज्ञों को रेटिना की बीमारियों की शुरुआती पहचान, समय पर इलाज तथा आंखों के आधुनिक उपचार विकल्पों के बारे में नवीनतम जानकारी प्रदान करना था.
ये थे मौजूद
कार्यक्रम में उपस्थित नेत्ररोग विशेषज्ञों द्वारा इंटरैक्टिव पैनल डिस्कशन आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ एसपी जाखनवाल ने किया. इस दौरान डॉ. कुमार साकेत, डॉ. शिवम मदान, डॉ आशा रानी प्रसाद, डॉ सीबीपी सिंह, डॉ सिंघल, डॉ मलय द्विवेदी, डॉ रेणु पांडे, डॉ राकेश, डॉ आजम, डॉ विवेक, डॉ नितेश सिंह, डॉ नीलुतपाल शर्मा, डॉ देव सहित शहर के कई नेत्र चिकित्सक शामिल थे.
