जमशेदपुर : झारखंड की खनिज संपदा और एमएमडीआर संशोधन अधिनियम 2026 को लेकर राज्य की सियासत गरमा गयी है. शनिवार को जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित तुलसी भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झामुमो-कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए एमएमडीआर एक्ट को लेकर जनता को गुमराह कर रही है. मरांडी ने कहा - खनिजों पर अतिरिक्त कर से कोयला और आयरन ओर महंगा होगा, जिसका असर उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता, उत्पादन और रोजगार पर पड़ सकता है.
कोयला-आयरन ओर महंगा हुआ तो उद्योगों पर पड़ेगा असर
बाबूलाल मरांडी ने कहा - झारखंड में कोयला और आयरन ओर जैसे प्रमुख खनिजों पर अतिरिक्त कर का बोझ उद्योगों की लागत बढ़ा सकता है. उन्होंने दावा किया कि कोयले पर 450 रुपये प्रति टन और आयरन ओर पर 600 रुपये प्रति टन अतिरिक्त कर लगाया गया है. उनके मुताबिक, 30 टन कोयले की खेप पर 13,500 रुपये और इतनी ही मात्रा के आयरन ओर पर 18,000 रुपये अतिरिक्त भार पड़ता है. उन्होंने कहा - जमशेदपुर जैसे औद्योगिक शहर में इसका प्रभाव विशेष रूप से देखा जा सकता है, क्योंकि स्टील उद्योग के लिए कोयला और आयरन ओर प्रमुख कच्चा माल हैं. उनका दावा है कि यदि झारखंड में खनिज दूसरे राज्यों की तुलना में महंगे होंगे, तो उद्योग ओडिशा, पश्चिम बंगाल या छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से खरीद का विकल्प तलाश सकते हैं.
राज्यों को खनिज राजस्व में बढ़ी हिस्सेदारी का दिया आंकड़ा
मरांडी ने केंद्र-राज्य खनिज राजस्व के आंकड़े भी रखे. उन्होंने कहा कि राज्यों की हिस्सेदारी 2014-15 के करीब 60.24 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 88.53 प्रतिशत हो गयी है और राज्यों को मिलने वाली राशि करीब 25 हजार करोड़ से बढ़कर 1,14,549 करोड़ रुपये तक पहुंची है. केंद्र सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार भी 2025-26 में राज्यों को खनन क्षेत्र से करीब 1,14,549 करोड़ रुपये मिले और खनन राजस्व का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा राज्यों को जाता है. सरकार का कहना है कि 2026 का संशोधन राज्यों के राजस्व को कम नहीं करता.
झारखंड में खदानों की नीलामी को लेकर सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने झारखंड में खनिज संसाधनों के इस्तेमाल और खदानों की नीलामी को लेकर भी राज्य सरकार पर सवाल उठाये. उन्होंने पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा क्षेत्र में बंद पड़ी आयरन ओर खदानों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं. उन्होंने ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा - वहां खदानों की नीलामी और संचालन से राज्य को अतिरिक्त राजस्व मिला है. केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक 2015 के बाद 17 राज्यों में 723 प्रमुख खनिज ब्लॉकों की नीलामी हुई है.
अवैध खनन को लेकर भी लगाये आरोप
मरांडी ने झारखंड में अवैध कोयला खनन, आयरन ओर के उत्खनन और परिवहन को लेकर भी आरोप लगाये. उन्होंने दावा किया कि वैध स्रोत से खनिज उपलब्ध नहीं होने के कारण कुछ उद्योगों के सामने परेशानी है. हालांकि, संवाददाता सम्मेलन में इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई स्वतंत्र दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया. उन्होंने राज्य सरकार से खदानों की पारदर्शी नीलामी, वैध खनन को बढ़ावा देने और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की मांग की. संवाददाता सम्मेलन में भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अभय सिंह, जमशेदपुर महानगर अध्यक्ष संजीव सिन्हा और जिला मीडिया प्रभारी प्रेम कुमार झा मौजूद थे.
