65 साल की उम्र में थम गया सफर, झारखंड आंदोलन के सक्रिय साथी दुबराज कुंभकार का निधन

झारखंड आंदोलन के एक सक्रिय सदस्य, दुबराज कुंभकार, जिनका 65 वर्ष की आयु में निधन हो गया, ने अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा राज्य के हितों के लिए संघर्ष करते हुए बिताया. उनके निधन से समुदाय में गहरा शोक है.

जमशेदपुर : झारखंड आंदोलनकारी एवं बोड़ाम प्रखंड के बड़ा सुसनी निवासी दुबराज कुंभकार (65) का मंगलवार  को हृदयाघात से निधन हो गया. अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद परिजन उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जा रहे थे. दोपहर करीब 12:30 बजे अस्पताल पहुंचने से पहले रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया.

उनके निधन की खबर मिलते ही बड़ा सुसनी सहित आसपास के गांवों में शोक की लहर दौड़ गयी. सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने उनके निधन पर गहरा दुख जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की.

छात्र जीवन से ही झारखंड आंदोलन में रहे सक्रिय

दुबराज कुंभकार छात्र जीवन से ही अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर चलाये गये आंदोलन से जुड़ गये थे. झारखंड आंदोलन के दौरान उन्होंने सक्रिय भूमिका निभायी और आंदोलन को मजबूत करने के लिए क्षेत्र के लोगों को संगठित करने में भी योगदान दिया. वे शहीद निर्मल महतो के नेतृत्व और उनके विचारों से काफी प्रभावित थे. निर्मल महतो के संघर्ष और अलग झारखंड राज्य की परिकल्पना को लेकर वे लंबे समय तक आंदोलन से जुड़े रहे.

आंदोलन के दौर में उन्होंने क्षेत्र के ग्रामीणों के बीच झारखंड अलग राज्य की मांग और आंदोलन के उद्देश्यों को पहुंचाने का काम किया. उनके साथ आंदोलन से जुड़े रहे लोगों के अनुसार, दुबराज कुंभकार संघर्ष के दिनों में लगातार सक्रिय रहते थे और आंदोलनकारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते थे. झारखंड राज्य के गठन के बाद भी वे आंदोलन की मूल भावना और झारखंडी हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर सजग रहे.

सामाजिक सरोकारों में भी निभायी महत्वपूर्ण भूमिका

दुबराज कुंभकार केवल झारखंड आंदोलन तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि सामाजिक जीवन में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही. क्षेत्र के लोगों के बीच वे सहज, सरल, मृदुभाषी और मिलनसार व्यक्ति के रूप में जाने जाते थे. सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए लोगों को उचित मार्गदर्शन देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती थी.

ग्रामीणों के सुख-दुख में वे हमेशा सहभागी रहते थे. उनके निधन से झारखंड आंदोलन से जुड़े साथियों के अलावा सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं में भी शोक है. लोगों का कहना है कि दुबराज कुंभकार ने अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा झारखंड और यहां के लोगों के हितों के लिए संघर्ष करते हुए बिताया. उनके निधन से क्षेत्र ने एक अनुभवी सामाजिक कार्यकर्ता और झारखंड आंदोलन के सक्रिय साथी को खो दिया है.

पत्नी और दो पुत्रों को छोड़ गये पीछे

दुबराज कुंभकार अपने पीछे पत्नी और दो पुत्र अशोक कुंभकार एवं दीपक कुंभकार सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गये हैं. उनके आकस्मिक निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. निधन की सूचना मिलने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिचित उनके आवास पहुंचे तथा शोक संतप्त परिवार को ढांढ़स बंधाया.

सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने दिवंगत दुबराज कुंभकार के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि झारखंड आंदोलन के प्रति उनका योगदान हमेशा याद किया जायेगा. लोगों ने उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और शोक संतप्त परिवार को इस दुख की घड़ी में धैर्य प्रदान करने की कामना की.

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लेखक के बारे में

By दशमत सोरेन

दशमत सोरेन ने रांची विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर किया है. वे 29 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उनकी विशेषज्ञता मुख्य रूप से झारखंड की आदिवासी-मूलवासी राजनीति, स्थानीय समुदायों की भाषा-संस्कृति और यहां के सामाजिक ताना-बाना है. वे वर्ष 2010 से प्रभात खबर के साथ एक ट्राइबल रिपोर्टर के रूप में काम कर रहे हैं.

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