जमशेदपुर : टाटा ग्रुप द्वारा जमशेदपुर फुटबॉल क्लब (जेएफसी) को बंद किए जाने के फैसले से पूरे राज्य के फुटबॉल खिलाड़ी और खेल प्रेमी निराश हैं. सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक, फुटबॉल प्रेमी और कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी टाटा ग्रुप से अपने इस फैसले को वापस लेने की अपील कर रहे हैं.
जेएफसी को 12 अगस्त तक आइएसएल में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने की डेडलाइन
इस बीच एआइएफएफ ने जेएफसी को 12 अगस्त तक इंडियन सुपर लीग (आइएसएल) में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने की डेडलाइन दी है. नौ साल पुराने जमशेदपुर फुटबॉल क्लब ने पूरे झारखंड में अपनी एक अलग पहचान बनायी है. झारखंड मुख्य रूप से आदिवासी बहुल राज्य है. यहां ग्रामीण क्षेत्रों में फुटबॉल को अत्यधिक पसंद और खेला जाता है. जेएफसी के बंद होने से खेल प्रेमी इसे अपनी व्यक्तिगत क्षति के रूप में देख रहे हैं. जेएफसी ने अपने नौ वर्षों के सफर में खूंटी के आदिवासी खिलाड़ी निखिल बारला को भारतीय सीनियर फुटबॉल टीम तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया. निखिल की सफलता से प्रेरित होकर कई युवा भी राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बनने का सपना देख रहे हैं. निखिल के अलावा जमशेदपुर के मोबश्शीर रहमान, गौरव मुखी और अमृत गोप जैसे खिलाड़ियों ने भी भारतीय फुटबॉल में अपनी खास पहचान बनायी है.
दुनिया के महान फुटबॉलरों ने भी किया टीम का प्रतिनिधित्व
साथ ही दुनिया के महान फुटबॉलर टिम काहिल जैसे दिग्गजों ने भी जेएफसी का प्रतिनिधित्व किया है. आइएसएल में जमशेदपुर की मुख्य टीम होने के कारण 2018 से टाटा फुटबॉल अकादमी के अधिकांश खिलाड़ी जेएफसी की रिजर्व टीम में खेल रहे थे. इससे उन्हें अन्य आइएसएल व आइलीग क्लबों में जाने का अवसर मिल रहा था. जेएफसी ने एआइएफएफ के गाइडलाइन के अनुसार कोचों के लिए लाइंसेंस कोर्स भी शुरू किए, जिससे सैकड़ों युवाओं को कोचिंग के क्षेत्र में रोजगार प्राप्त हुआ. साथ ही, जमशेदपुर में हर साल आइएसएल के लगभग 10 मैच आयोजित किए जाते थे. इससे शहर के होटल, पर्यटन, रेस्तरां और ट्रांसपोर्ट, पेंटिंग, टी-शर्ट का व्यवसाय को काफी बढ़ावा मिल रहा था. जेएफसी के बंद होने की खबर से अब इन सभी क्षेत्रों से जुड़े लोगों में निराशा का माहौल है.
