जमशेदपुर : कोलकाता के विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन में सोमवार को खेला गया डूरंड कप का क्वार्टर फाइनल मुकाबला सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि एक युग की अंतिम सांसों का गवाह बना. पेनल्टी शूटआउट में मोहन बागान ने जमशेदपुर एफसी (जेएफसी) को 9-8 से हराकर सेमीफाइनल में कदम रखा. इस शिकस्त के साथ ही जेएफसी का वजूद भी इतिहास के सीने में सदा के लिए दफन हो गया.
30 जुलाई को लिया था क्लब को बंद करने का फैसला
टाटा ग्रुप द्वारा 30 जुलाई को ही क्लब को बंद करने का दर्दनाक फैसला लिया जा चुका था. लेकिन, जेएफसी के खिलाड़ी मैदान पर सिर्फ मैच नहीं, बल्कि अपनी टीम की अंतिम सांसों को बचाने की जंग लड़ रहे थे. मंगलवार को मिली हार ने इस जीवंत क्लब को यादों का हिस्सा बना दिया. अब लाल जर्सी में जमशेदपुर की यह टीम कभी किसी पेशेवर लीग में नजर नहीं आयेगी. हालांकि, टाटा स्टील ने जूनियर स्तर पर गतिविधियां जारी रखने की बात कही है, पर यूथ लीग में टीम का नया नाम क्या होगा, यह अनसुलझा सवाल है.
सपनों का सफर और आंसुओं में विदाई
2017-18 में आईएसएल में कदम रखने वाली इस टीम ने 2021-22 में आइएसएल लीग-शील्ड जीतकर इतिहास रचा और 2024-25 सुपर कप के फाइनल तक का शानदार सफर तय किया. क्लब ने भारतीय सीनियर राष्ट्रीय टीम को 10 से अधिक विश्वस्तरीय खिलाड़ी दिए. अपनी बेहतरीन सुविधाओं, विश्वस्तरीय अभ्यास मैदान और मेहमाननवाजी के कारण जेएफसी हर भारतीय फुटबॉलर का पहला सपना हुआ करती था. महज नौ सालों में जेएफसी ने देश का सबसे जुनूनी फैन बेस खड़ा किया था. वक्त का पहिया घूमा और कॉर्पोरेट फैसलों की कड़वी सच्चाई ने लाखों फुटबॉल प्रेमियों का दिल तोड़ दिया. क्लब के अचानक ओझल हो जाने से खेल प्रेमियों की आंखें नम हैं, लेकिन शहर की हवाओं में आज भी एक ही गूंज है ‘जमकर खेला जमशेदपुर’.
