जमशेदपुर: अगर जेब में पैसे हैं, तो जमशेदपुर में नई पहचान तैयार कराने का दावा करने वाला एक पूरा नेटवर्क सक्रिय होने की बात सामने आ रही है. कचहरी के फुटपाथ से लेकर मानगो की गलियों और ग्रामीण पंचायतों तक बिचौलियों का जाल फैला होने का आरोप है. दावा है कि महज 200 से 500 रुपये से शुरू होने वाला यह खेल धीरे-धीरे राशन कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस और फिर पासपोर्ट तक पहुंच जाता है.
इस पूरे नेटवर्क में जाली जन्म प्रमाण पत्र, फर्जी बिजली बिल, किराया एग्रीमेंट और दूसरे दस्तावेजों का इस्तेमाल कर पहचान तैयार कराने की बात कही जा रही है. यही दस्तावेज आगे दूसरे सरकारी कागजात बनवाने का आधार बनते हैं. आरोप है कि साकची, गोलमुरी, सिदगोड़ा, मानगो, कपाली और जुगसलाई के कई साइबर कैफे और गुमटियां इस काम के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं.
तीन अफगान नागरिकों के लंबे समय तक फर्जी पहचान के सहारे रहने और राज्य में पकड़े गये 19 जाली पासपोर्ट में से 9 के जमशेदपुर से जुड़े होने की जानकारी सामने आने के बाद फर्जी पहचान के इस नेटवर्क ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं.
200 रुपये से शुरू होकर 50 हजार तक पहुंचता है ‘पैकेज’
दावा है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कराने का यह कारोबार अलग-अलग जरूरत के हिसाब से अलग कीमत पर चलता है. 200 से 500 रुपये में बिना ठोस पड़ताल के ड्राइविंग लाइसेंस, पहचान पत्र या वोटर आईडी तैयार कराने की बात कही जा रही है. वहीं करीब 1,000 रुपये में कोर्ट-कचहरी में जमानत के लिए फर्जी कागजात से लैस किराये का जमानतदार उपलब्ध कराने का दावा है.
सबसे बड़ा पैकेज 15 हजार से 50 हजार रुपये तक बताया जा रहा है. इसमें जन्म प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, वोटर आईडी से लेकर पासपोर्ट तक तैयार कराने के साथ खाड़ी देशों में नौकरी के लिए फर्जी डिग्री और नकली वीजा उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है.
ऐसे आगे बढ़ता है फर्जी पहचान का खेल
पहले चरण में असली बिजली बिल या नगर निकाय की होल्डिंग टैक्स रसीद की पीडीएफ फाइल में कंप्यूटर से बदलाव किए जाने की बात सामने आती है. इसमें नाम, पिता का नाम, मीटर नंबर और पता बदलकर नया प्रिंट निकाल लिया जाता है.
इसके बाद ग्रामीण इलाकों के जनप्रतिनिधियों के लेटरहेड, डॉक्टरों के नकली हस्ताक्षर और मुहरों के जरिए पुराने तारीख के शपथ पत्र या बिना रिकॉर्ड वाले जन्म प्रमाण पत्र तैयार किए जाने का आरोप है.
तीसरे चरण में इन दस्तावेजों को सरकारी पोर्टल पर अपलोड किया जाता है. आरोप है कि केवल स्कैन कॉपी के आधार पर होने वाली प्रक्रिया में दस्तावेज पर लगी मुहर या हस्ताक्षर की वास्तविकता की जांच में कमी का फायदा उठाया जाता है.
एक जाली कागज से चार कड़ियों में तैयार होती है पहचान
इस पूरे खेल में पहली कड़ी जाली जन्म प्रमाण पत्र या बैकडेट का शपथ पत्र बताया जाता है. इसके बाद इसी के आधार पर फर्जी रेंट एग्रीमेंट के साथ राशन कार्ड में नाम जुड़वाने की बात कही गई है.
राशन कार्ड बनने के बाद उसी पहचान के आधार पर वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने और फिर परिवहन विभाग की प्रक्रिया के जरिए ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने का आरोप है.
जब एक ही नाम और पते पर कई पहचान पत्र तैयार हो जाते हैं, तो उसी आधार पर पासपोर्ट के लिए आवेदन किया जाता है. यहीं पुलिस सत्यापन की भूमिका सबसे अहम हो जाती है. आरोप है कि कुछ मामलों में आवेदक के घर पर जाकर जांच करने के बजाय थाने में ही रिपोर्ट तैयार कर दी जाती है. इससे पहले से तैयार फर्जी दस्तावेज जांच में इस्तेमाल हो जाते हैं.
शहर में पहले भी सामने आ चुके हैं फर्जीवाड़े के कई मामले
जमशेदपुर और आसपास के इलाकों में फर्जी दस्तावेज और पहचान से जुड़े मामले पहले भी सामने आ चुके हैं.
मई 2025 में चाकुलिया की मटियाबांधी पंचायत में 4,281 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाने का मामला सामने आया था. बीडीओ आरती मुंडा की शिकायत पर पंचायत सचिव सुनील महतो और वीएलई सपन महतो समेत पांच लोगों को जेल भेजा गया था.
2019 में मानगो में सीमा पार से अवैध रूप से आयी राबिया बसरी के करीब नौ साल तक रहने का मामला सामने आया था. आरोप था कि उसने फर्जी कागजात के आधार पर भारतीय पासपोर्ट बनवाया और अपने बच्चे के साथ लौट गयी. बाद में पुलिस ने उसके पति शाहिन महमूद को गिरफ्तार किया था.
अक्तूबर 2025 में मानगो चौक से मोनाजिर नामक व्यक्ति को मुंबई क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया था. उस पर 10वीं से लेकर बीई और एमबीए तक की जाली डिग्रियां तैयार करने का आरोप था. इन दस्तावेजों के सहारे पासपोर्ट बनवाकर कई देशों की यात्रा किए जाने की बात सामने आयी थी.
अप्रैल 2025 में मानगो के जवाहर नगर रोड नंबर 6 स्थित एक दुकान पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में कंप्यूटर और डेटा जब्त किया गया था. वहां फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर युवाओं को विदेश में नौकरी के लिए भेजे जाने का मामला सामने आया था.
2013 में कचहरी परिसर में 200 रुपये में फर्जी लाइसेंस और 500 रुपये में 24 घंटे में वोटर कार्ड बनाने वाले दलालों को बार एसोसिएशन के तत्कालीन महासचिव अनिल कुमार तिवारी ने पकड़कर पुलिस को सौंपा था.
इसके अलावा परसुडीह के मकदमपुर में सोशल मीडिया के जरिये युवाओं से 1.5 लाख रुपये लेकर दुबई का नकली वीजा और हवाई टिकट देने वाले गिरोह का भी खुलासा हुआ था.
जमशेदपुर में ही क्यों आसानी से फैल रहा है यह नेटवर्क
औद्योगिक शहर होने के कारण जमशेदपुर में ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार से बड़ी संख्या में मजदूर और कामगार आते हैं. ऐसे में किसी बाहरी व्यक्ति का शहर में घुल-मिल जाना आसान माना जाता है.
चाकुलिया, बहरागोड़ा, पोटका और चांडिल के रास्ते बंगाल और ओडिशा की सीमाएं भी नजदीक हैं. आरोप है कि इन रास्तों से संदिग्ध लोगों को शहर तक लाकर बिचौलियों से संपर्क कराया जाता है.
मानगो, आजादनगर, कपाली और जुगसलाई जैसे इलाकों में किराये के मकानों में रहने वाले लोगों के सत्यापन को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं. आरोप है कि कुछ मामलों में बिना पुलिस जांच के मकान किराये पर दे दिए जाते हैं, जिससे स्थानीय पता तैयार करना आसान हो जाता है.
पासपोर्ट सत्यापन पर भी उठ रहे सवाल
पासपोर्ट के लिए आवेदन करने के बाद ऑनलाइन सिस्टम के जरिए संबंधित फाइल थाने भेजी जाती है. जांच अधिकारी को आवेदक के घर जाकर पता सत्यापित करने और पड़ोसियों से जानकारी लेने की प्रक्रिया पूरी करनी होती है.
लेकिन आरोप है कि थानों में काम के दबाव के कारण कुछ मामलों में आवेदक को थाने बुलाकर वहीं से रिपोर्ट तैयार कर दी जाती है. ऐसे में अगर आवेदक पहले ही दूसरे विभागों से असली जैसे दिखने वाले पहचान पत्र हासिल कर चुका हो, तो फर्जी दस्तावेज पकड़ना मुश्किल हो सकता है.
विभागों का डेटा आपस में जुड़ना जरूरी
फर्जी पहचान के इस पूरे खेल को रोकने के लिए अलग-अलग सरकारी विभागों के बीच डेटा साझा करने और क्रॉस-वेरिफिकेशन की जरूरत बतायी जा रही है. नगर निकाय, राशन विभाग, चुनाव शाखा और परिवहन विभाग के रिकॉर्ड अगर आपस में सीधे जुड़ें, तो एक ही पते, मोबाइल नंबर या दूसरे विवरण पर बार-बार बन रहे दस्तावेजों की पहचान करना आसान हो सकता है.
जब तक अलग-अलग विभागों के रिकॉर्ड के बीच रियल-टाइम क्रॉस-वेरिफिकेशन की व्यवस्था मजबूत नहीं होती, तब तक फर्जी दस्तावेजों के जरिए पहचान तैयार करने के मामलों पर पूरी तरह रोक लगाना चुनौती बना रह सकता है.
