जमशेदपुर NML की पहल: ई-कचरे से सोना-चांदी निकालने की तकनीक सीखेंगे कबाड़ कारोबारी

Jamshedpur E Waste Training: सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (NML) जमशेदपुर में ई-कचरे से सोना, चांदी और तांबा निकालने की वैज्ञानिक तकनीक के लिए मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण शुरू हुआ. इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की इस परियोजना के तहत देश भर में 30 एमएसएमई इको-पार्क क्लस्टर बनाए जाएंगे, जिससे 15,000 असंगठित कबाड़ कारोबारी प्रशिक्षित होकर सूक्ष्म उद्यमी बनेंगे और खुले में ई-कचरा जलना बंद होगा.

जमशेदपुर से संदीप कुमार की रिपोर्ट

Jamshedpur E Waste Training, जमशेदपुर: पुराने मोबाइल, कंप्यूटर और सर्किट बोर्ड को कचरा समझकर फेंकने या जलाने के दिन अब लदने वाले हैं. ई-कचरे (E-Waste) में छुपे सोने, चांदी और तांबे जैसी कीमती धातुओं को वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से निकालने की आधुनिक स्वदेशी तकनीक अब देश के असंगठित कबाड़ और ई-कचरा कारोबारियों तक पहुंचेगी. इसी बड़े लक्ष्य के साथ सोमवार को सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (CSIR-NML), जमशेदपुर में एक सप्ताह के विशेष ‘मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण कार्यक्रम’ का भव्य आगाज हुआ. कार्यक्रम का आधिकारिक उद्घाटन एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी ने किया.

कारोबारियों को ‘माइक्रो एंटरप्रेन्योर’ बनाने का प्लान

परियोजना प्रमुख डॉ. मनीष कुमार झा ने इस महत्वाकांक्षी योजना की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि इस एक सप्ताह के कार्यक्रम में कुल 50 मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जा रहे हैं. ये मास्टर ट्रेनर्स यहां से तकनीक सीखकर आगे चलकर पूरे देश में 300 दिनों तक चलने वाली विभिन्न कार्यशालाओं (Workshops) का संचालन करेंगे. इन कार्यशालाओं के जरिए देश भर के करीब 15,000 असंगठित ऑपरेटरों और कबाड़ कलेक्टर्स को प्रशिक्षित किया जाएगा. इस विशेष प्रशिक्षण सत्र में टेरी (TERI) और रेकार्ट (REKART) जैसी नामचीन संस्थाओं के विशेषज्ञ भी हिस्सा ले रहे हैं.

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खुले में नहीं जलेगा कचरा, पर्यावरण को मिलेगी सुरक्षा

डॉ. झा ने बताया कि वर्तमान में दिल्ली के सीलमपुर और उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जैसे बड़े कबाड़ बाजारों में ई-कचरे को खुले में जलाया जाता है या फिर कीमती धातुएं निकालने के लिए बेहद खतरनाक तेजाब और रसायनों का बेतरतीब इस्तेमाल होता है. इससे हवा और पानी जहरीले हो चुके हैं और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य को भारी नुकसान पहुंचा है. एनएमएल के इस प्रशिक्षण में ऐसी सुरक्षित, हरित (Green) और पूर्णतः स्वदेशी तकनीकें सिखाई जा रही हैं, जिनसे पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए प्रतिदिन 100 से 300 किलोग्राम सर्किट बोर्ड और 400 किलोग्राम तक प्लास्टिक ई-कचरे का वैज्ञानिक उपचार (Scientific Recycling) बेहद आसानी से संभव हो सकेगा.

देशभर में बनेंगे 30 एमएसएमई इको-पार्क क्लस्टर

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा प्रायोजित इस राष्ट्रीय परियोजना में सी-मेट (C-MET) हैदराबाद और सिपेट-लार्पम (CIPET-LARPM) भुवनेश्वर भी मुख्य भागीदार की भूमिका निभा रहे हैं. इस केंद्र सरकार की योजना के तहत विभिन्न राज्य सरकारों के सहयोग से पूरे देश में 30 एमएसएमई (MSME) इको-पार्क क्लस्टर स्थापित किए जाएंगे. ये क्लस्टर असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले छोटे कारोबारियों को एक संगठित ‘सूक्ष्म उद्यमी’ (Micro Entrepreneur) के रूप में उद्योग की मुख्यधारा से जोड़ने का काम करेंगे, जिससे उनका आर्थिक स्तर सुधरेगा.

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Published by: Sameer Oraon

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