मूर्ति स्थापना को लेकर विवाद, ग्रामीणों के विरोध के बाद प्रशासन ने हटवाई प्रतिमा, जानें क्या है मामला

घाटशिला के चेंगजोड़ा में मूर्ति स्थापना को लेकर ग्रामीणों ने किया विरोध, प्रशासन ने वन भूमि और सार्वजनिक स्थल का हवाला देकर मूर्ति को कब्जे में लिया।

घाटशिला : घाटशिला थाना की काशिदा पंचायत के चेंगजोड़ा फुटबॉल मैदान में रविवार को दिवंगत कुनाराम मुर्मू की मूर्ति स्थापना को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया. एक पक्ष मूर्ति स्थापना करने के पक्ष में था, वहीं स्थानीय ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान भादो मुर्मू के नेतृत्व में सार्वजनिक स्थल, फुटबॉल मैदान और वन भूमि का हवाला देते हुए इसका विरोध किया. ग्रामीणों के विरोध की सूचना पर घाटशिला के सीओ निशांत अंबर, थाना प्रभारी राजेंद्र मुंडा और प्रभारी वनपाल संजय दास मौके पर पहुंचे. दोनों पक्षों से बातचीत की. काफी देर तक चली चर्चा के बाद सहमति नहीं बनने पर प्रशासन ने मूर्ति हटाने का निर्णय लिया.

बिना सर्वसम्मति के मूर्ति स्थापना उचित नहीं : सीओ

इस मामले में सीओ निशांत अंबर ने बताया - यह मामला पुराना है. संबंधित स्थल सार्वजनिक और वन भूमि के अंतर्गत आता है. ऐसे में बिना सर्वसम्मति के किसी भी प्रकार का निर्माण या स्थापना उचित नहीं है. वन विभाग मूर्ति को अपने कब्जे में लेकर घाटशिला रेंज कार्यालय ले जाया गया. वहीं, घाटशिला थाना प्रभारी राजेंद्र कुमार मुंडा डेढ़ बजे से लेकर पांच बजे वहीं डटे रहे. उन्होंने कहा - दिवंगत कुनाराम मुर्मू की मूर्ति स्थापित करनी थी, तो पहले सभी ग्रामीणों की सहमति और पुलिस-प्रशासन को सूचना देना आवश्यक था.

पूर्व में भी इस मामले को लेकर हुई थी बैठक

यह पुराना विवाद है. बताया कि पूर्व में भी इस मामले को लेकर अनुमंडल स्तर पर बैठक हुई थी, जिसमें सार्वजनिक जगह फुटबॉल मैदान में दोनों पक्षों की सहमति से ही किसी कार्य को करने की बात तय हुई थी. वहीं घाटशिला के प्रभारी वनपाल संजय दास ने बताया कि घाटशिला अंचलाधिकारी एवं थाना प्रभारी की सहमति तथा वन विभाग के वरीय अधिकारियों के निर्देश पर दिवंगत कुनाराम मुर्मू की मूर्ति को अपने कब्जे में लेकर घाटशिला रेंज कार्यालय पहुंचाया.

प्रस्तावित स्थल फुटबॉल मैदान है : ग्राम प्रधान

वहीं ग्रामीणों के विरोध को लेकर ग्राम प्रधान भादो मुर्मू ने कहा कि बिना ग्रामसभा की सहमति के सार्वजनिक स्थल पर मूर्ति स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा था. इसका ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे हैं. बताया कि प्रस्तावित स्थल फुटबॉल मैदान एवं वन विभाग की भूमि है, जहां किसी भी प्रकार का निर्माण बिना अनुमति संभव नहीं है. इस मामले को लेकर ग्रामीणों द्वारा पूर्व में घाटशिला थाना, अंचल कार्यालय तथा अनुमंडल पदाधिकारी को भी शिकायत दी जा चुकी है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब ग्रामीणों की सहमति नहीं है और विवाद पुराना है, तो ऐसे में मूर्ति स्थापना का क्या औचित्य है.

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लेखक के बारे में

By मो. युनूस परवेज

मो. युनूस परवेज वर्ष 1995 से पत्रकारिता कर रहे हैं. उन्होंने घाटशिला महाविद्यालय और रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक और राजनीतिक विज्ञान ऑनर्स की डिग्री हासिल की है. इनकी राजनीति, अपराध, नक्सलवाद, खेल, शिक्षा और खेती किसानी की खबरों में विशेष रुचि है. डिजिटल जर्नलिज्म में 5 साल का अनुभव है.

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