कभी था मेटरनिटी क्लिनिक, आज दिव्यांगों की जिंदगी संवार रहा ‘सबल सेंटर’, 1938 में रखी गई थी नींव, पढें पूरी खबर

साकची के एक ऐतिहासिक भवन ने 84 साल बाद बदली अपनी पहचान. कभी मेटरनिटी क्लिनिक रहा यह ढांचा अब दिव्यांगजनों के लिए उम्मीद का केंद्र 'सबल सेंटर' बन गया है. जानें कैसे यह भवन अब जीवन संवार रहा है.

जमशेदपुर : साकची में जेएनएसी कार्यालय के बगल से गुजरते हुए शायद ही किसी का ध्यान उस पुरानी इमारत पर जाता हो, जिसके भीतर इतिहास के कई पन्ने छिपे हैं. बाहर आज भी किंग जॉर्ज पंचम की प्रतिमा इस इमारत के पुराने इतिहास की गवाही देती है. कभी यहां मेटरनिटी एंड चाइल्ड वेलफेयर क्लिनिक चलता था. आज यही ऐतिहासिक भवन दिव्यांगजनों के लिए उम्मीद और आत्मनिर्भरता का केंद्र बन चुका है—‘सबल सेंटर’.

1938 में रखी गई थी नींव

टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (टिस्को) के लिए 1918 से 1924 का दौर आसान नहीं था. कंपनी एक ओर विस्तार की प्रक्रिया से गुजर रही थी, तो दूसरी ओर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही थी. इसी दौर में टाटा मेन हॉस्पिटल के विस्तार की जरूरत महसूस हुई. 1930 के दशक की शुरुआत में कंपनी को यह अहसास होने लगा था कि कर्मचारियों और आसपास की आबादी के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की जरूरत है. इसके लिए बिष्टुपुर के एल टाउन, सोनारी और साकची को प्रमुख स्थानों के रूप में चिन्हित किया गया. इसके बाद 27 मार्च 1938 को टिस्को के तत्कालीन जनरल मैनेजर जे.जे. गांधी ने साकची क्लिनिक की नींव रखी. करीब सात महीने बाद 27 अक्टूबर 1938 को बिहार के तत्कालीन गवर्नर की पत्नी लेडी हैलेट ने मेटरनिटी एंड चाइल्ड वेलफेयर क्लिनिक का उद्घाटन किया.

मेटरनिटी क्लिनिक की तस्वीर. (फाइल फोटो)

इमारत का किंग जॉर्ज पंचम से क्या है रिश्ता?

इस पुरानी इमारत की कहानी सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित नहीं है. इसका रिश्ता ब्रिटिश शाही परिवार और किंग जॉर्ज पंचम के दौर से भी जुड़ा है. किंग जॉर्ज पंचम ने 1911 में भारत का दौरा किया था। इसी दौरान उनका भारतीय इतिहास और टाटा परिवार से भी जुड़ाव रहा. उन्होंने सर दोराबजी टाटा को नाइटहुड की उपाधि प्रदान की थी. कहा जाता है कि लेडी हैलेट के मन में किंग जॉर्ज पंचम के प्रति विशेष सम्मान था. 1936 में किंग जॉर्ज पंचम की मृत्यु के दो वर्ष बाद, इस इमारत का उद्घाटन हुआ और इसे उनकी स्मृति को समर्पित किया गया. उनकी प्रतिमा भी यहां स्थापित की गई, जो आज भी इस परिसर के इतिहास की पहचान बनी हुई है.

मेटरनिटी क्लिनिक से ‘सबल’ तक का सफर

करीब 84 वर्षों तक यह इमारत स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी रही. वर्ष 2022 तक यहां मेटरनिटी एंड चाइल्ड वेलफेयर क्लिनिक संचालित होता था. इसके बाद टाटा स्टील फाउंडेशन ने इस ऐतिहासिक भवन को एक नई भूमिका दी और इसे दिव्यांगजनों के लिए समर्पित करते हुए ‘सबल सेंटर’ का रूप दिया. आज वही भवन, जहां कभी माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल होती थी, दिव्यांगजनों को सशक्त, आत्मनिर्भर और रोजगार से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है.

21 तरह की दिव्यांगता के लिए काम

सबल सेंटर पूर्वी सिंहभूम जिले में 21 अलग-अलग प्रकार की दिव्यांगताओं से जुड़े लोगों के लिए काम कर रहा है। इसका उद्देश्य केवल सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों को अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर देना है. इसके तहत दिव्यांगजनों को भवन और कार्यस्थल को उनके अनुकूल बनाने की जानकारी दी जा रही है. कौशल और रोजगार से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है. जरूरी दस्तावेज और दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाने में सहयोग किया जा रहा है. सरकारी सेवाओं और योजनाओं तक पहुंच बनाने में मदद की जा रही है. सिविल सर्जन कार्यालय के सहयोग से दिव्यांगता प्रमाणपत्र सहित अन्य जरूरी दस्तावेज तैयार कराने में भी सेंटर सहायता कर रहा है.

20 कुष्ठ आश्रमों तक पहुंच

सबल सेंटर का काम सिर्फ साकची या शहर तक सीमित नहीं है. पूर्वी सिंहभूम जिले के 20 कुष्ठ आश्रमों में भी सेंटर की ओर से कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. इसका मकसद समाज के उन लोगों तक पहुंचना है, जो अक्सर मुख्यधारा की सुविधाओं से दूर रह जाते हैं. सबल की पहुंच को और व्यापक बनाने के लिए नोवामुंडी और सुकिंदा में भी इसके सेंटर संचालित हैं.

इतिहास बदला, मकसद बदला… लेकिन सेवा जारी रही

1938: मेटरनिटी एंड चाइल्ड वेलफेयर क्लिनिक की शुरुआत

2022: ऐतिहासिक भवन बना सबल सेंटर आज: 21 प्रकार की दिव्यांगताओं के लिए काम, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने की पहल. एक समय यह इमारत मां और बच्चे के स्वास्थ्य की सुरक्षा का केंद्र थी. आज यही जगह दिव्यांगजनों के अधिकार, सम्मान और आत्मनिर्भरता की लड़ाई का हिस्सा बन चुकी है. साकची की इस पुरानी इमारत की दीवारें भले ही इतिहास को संजोए हुए हैं, लेकिन इसके भीतर चल रहा काम भविष्य की ओर देखता है.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Nesar ahamad

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >