डुमरिया : डुमरिया के माड़ोतोलियां गांव तक रोज सुबह सूरज की रोशनी तो पहुंच जाती है, लेकिन विकास का सूरज यहां तक नहीं पहुंचा है. आजादी के बाद से ही यहां के ग्रामीण एक अदद सड़क के लिए तरस रहे हैं. माड़ोतोलिया से छोटाबोतला की दूरी लगभग 5 से सात किमी है. पहाड़ों के बीच रास्ता होने के कारण सड़क पर सिर्फ पत्थर ही पत्थर है. बारिश में यह स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है.
विद्यार्थियों व मरीजाें को होती है परेशानी
सबसे अधिक परेशानी स्कूल के विद्यार्थी व मरीजों को होती है. बारिश के दिनों में मरीजों या गर्भवती महिलाओं की परेशानी बढ़ जाती है. कोई बीमार पड़ता है तो उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए गुड़ाबादा प्रखंड के गुड़ा होते हुए 20 से 25 किमी दूरी तय कर सीएचसी पहुंचाते हैं. जब कोई बीमार होता है तो उसे सीएचसी पहुंचाने के लिए पूरा गांव चिंतित होता है. वहीं, छोटाबोतला के रास्ते से सीएचसी की दूरी लगभग 9 किमी है. यहां के ग्रामीणों के साथ सबरों को भी राशन ले जाने में काफी परेशानी होती है. क्योंकि इन्हें राशन पांच किमी दूर मिलता है. सड़क नहीं होने से राशन ले जाना भी एक चुनौती है. ग्रामीण हर मामले में रोज चुनौतियों से लड़ रहें है. एक अदद सड़क के लिए परेशान हैं.
जंगल में सुरक्षा के लिए छात्राओं के साथ पिता रोज जाते हैं विद्यालय
माड़ोतोलिया की छात्राएं उच्च विद्यालय में पढ़ाई के लिए लगभग 5 किमी दूरी तय कर उउवि बड़ाबोतला जंगल के रास्ते पैदल जाती है. जंगलों के बीच माड़ोतोलिया से बड़ाबोतला तक की रास्ता होने के कारण छात्राओं के साथ एक अभिभावक रोजाना इनको पहुंचाने विद्यालय जाते हैं. फिर जब छुट्टी होती हैं तो इन्हें लाने के लिए भी बड़ाबोतला पहुंचते है. क्योंकि सुनसान पहाड़ी रास्ता होने के कारण बच्चों की सुरक्षा पर सवाल है. लड़कियों की पढाई की ललक व मजबूत इरादे रोजना 10 किमी दूरी को भी कम कर देता है. छात्राओं का कहना है हमें सरकार की ओर से साइकिल भी मिली हैं लेकिन सड़क साइकिल चलाने लायक भी नहीं है. मजबूरन पैदल ही जाना पडता हैं. बारिश में परेशानी काफी बढ़ जाती हैं. ग्रामीणों ने बताया - उच्चाधिकारी तो दूर बीडीओ भी हमारी समस्या सुनने कभी नहीं आये. जनप्रतिनिधियों से कई बार सड़क निर्माण की मांग रखे लेकिन आज तक कोई ठोस पहल नहीं हुई. हमलोग बैठक कर सड़क निर्माण को लेकर बड़ा कदम उठायेंगे.
