जमशेदपुर | एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल के हड्डी रोग विभाग ने गुणवत्तापूर्ण इलाज की मिसाल पेश की है. आजादनगर निवासी मो. फारुक अंसारी पिछले 10 वर्षों से स्पाइन टीबी जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. इस कारण उनका चलना-फिरना बंद हो गया था. आर्थिक तंगी की वजह से वे निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने में असमर्थ थे.
डॉ याकूब सांगा के नेतृत्व में शुरू हुआ इलाज
एमजीएम अस्पताल पहुंचने पर विभागाध्यक्ष डॉ याकूब सांगा के नेतृत्व में उनका इलाज शुरू हुआ. करीब पांच महीने पहले ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ विभाष चंद्रा और उनकी टीम ने जटिल सर्जरी की. सफल ऑपरेशन के बाद अब मो. फारुक पूरी तरह स्वस्थ हैं और बिना किसी सहारे के चल-फिर रहे हैं. गुरुवार को अस्पताल पहुंचे मो. फारुक ने अधीक्षक डॉ. बलराम झा, डॉ. सांगा, डॉ. विभाष और डॉ. भास्कर का आभार जताते हुए भावुक मन से कहा अगर एमजीएम नहीं होता, तो मुझे दूसरी जिंदगी नहीं मिलती. सरकारी अस्पतालों में भी गंभीर बीमारियों का विश्वस्तरीय और नि:शुल्क इलाज संभव है.
