वरीय संवाददाता, जमशेदपुर
XLRI में बुधवार को फुलक्रम 6.0 का आयोजन किया गया. इस वर्ष कार्यक्रम का विषय कंसल्टिंग इंडस्ट्री में बदलाव, लचीलापन और रणनीतिक परिवर्तन था. इसमें देश की कंसल्टिंग कंपनियों के वरिष्ठ विशेषज्ञ, उद्योग जगत के प्रतिनिधि व शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया और बदलते कारोबारी परिदृश्य पर विचार साझा किये. कार्यक्रम के पहले सत्र में सूचनाओं की अधिकता के दौर में सही निर्णय लेने की क्षमता पर चर्चा हुई. वक्ताओं ने कहा कि डेटा और तकनीक महत्वपूर्ण हैं, लेकिन सफल कंसल्टिंग के लिए अनुभव, व्यावहारिक समझ और सही निर्णय लेने की क्षमता सबसे अधिक आवश्यक है. कार्यक्रम का संचालन एक्सएलआरआइ के प्रो. कनगराज अय्यालुसामी, प्रो. सुनील सारंगी और रजनी रंजन ने किया.
जेनएआइ को अवसर के रूप में देखने पर जोरदूसरे सत्र में जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (जेनएआइ) के कंसल्टिंग क्षेत्र पर प्रभाव पर मंथन हुआ. केपीएमजी के विशेषज्ञ अनुराग खरे ने कहा कि जेनएआइ को खतरे के बजाय एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए. वहीं, आइबीएम कंसल्टिंग की प्रतिनिधि शर्मिष्ठा बागची ने कहा कि भविष्य में बेहतर परिणाम तभी मिलेंगे, जब मानव विशेषज्ञता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता मिलकर कार्य करेंगे.
कम्पटीशन एंड वैल्यू क्रिएशन पर देना होगा ध्यान
तीसरे सत्र में जेनएआइ के दौर में कंसल्टिंग सेवाओं की कीमत, प्रतिस्पर्धा और लाभ पर चर्चा हुई. डेलॉइट के प्रतिनिधि रोहन ने कहा कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच संस्थानों को अपनी विशेषज्ञता, इनोवेशन और कस्टमर के लिए मूल्य सृजन पर अधिक ध्यान देना होगा. उन्होंने भरोसे, विशेषज्ञता और जटिल निर्णय लेने में मानवीय क्षमता को कंसल्टिंग की सबसे बड़ी ताकत बताया.
