चक्रधरपुर: क्षेत्र की सुख, शांति और समृद्धि की कामना को लेकर रविवार को चक्रधरपुर शहर की पुरानाबस्ती स्थित संजय नदी किनारे मां पाउड़ी मंदिर में जंताल पूजा का आयोजन धूमधाम से किया गया. पूजा को लेकर सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी थी. पारंपरिक रीति-रिवाज और विधि-विधान के साथ मां पाउड़ी की पूजा की गयी.
देहुरी के घर से निकला घट, राजमहल में हुई पूजा
जंताल पूजा के तहत पुरानाबस्ती स्थित देहुरी (पुजारी) सुजीत नायक के घर से घट उठाया गया. घट को राजमहल (जवाहरलाल नेहरू महाविद्यालय) लाया गया, जहां महल के मुख्य द्वार और पाटपीढ़ा में मां पाउड़ी की पूजा-अर्चना की गयी. घट में तलवार, नये धान का पौधा, नयी साड़ी और चुनरी समेत पूजा सामग्री रखी गयी थी.
बाजे-गाजे के साथ मंदिर पहुंचा घट
राजमहल में पूजा के बाद बाजे-गाजे के साथ घट को पुरानाबस्ती मुख्य मार्ग, थाना रोड और सोनुवा रोड होते हुए मां पाउड़ी मंदिर लाया गया. संजय नदी किनारे पहुंचने के बाद विधिवत पूजा-अर्चना की गयी. नदी से पवित्र जल उठाकर मंदिर लाया गया. इस दौरान ढोल-नगाड़ों की गूंज से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया. व्रती और श्रद्धालु पारंपरिक उत्साह में झूमते नजर आये.
घट की राह में लेटकर मांगी मनोकामना
जंताल पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने मां पाउड़ी के प्रति अपनी आस्था जतायी. कई श्रद्धालु घट की राह में लेटकर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की कामना करते दिखे. मंदिर पहुंचने के बाद देहुरी सुजीत नायक ने क्षेत्र की खुशहाली, शांति और समृद्धि के लिए मां पाउड़ी की पूजा की. मनोकामना पूर्ण होने पर भक्तों ने मां को बकरे और बत्तख की बलि भी चढ़ायी. पूजा संपन्न होने के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया.
नये चावल की खीर का चढ़ेगा भोग, मनाया जायेगा नुआंखाई मान्यता है कि जंताल पूजा के दिन मां पाउड़ी को नये चावल से तैयार खीर का भोग लगाया जाता है. इसके बाद पुरानाबस्ती सहित आसपास के क्षेत्रों में नुआंखाई पर्व मनाया जाता है. मां पाउड़ी सेवा समिति की ओर से श्रद्धालुओं के बीच खीर-खिचड़ी का वितरण भी किया गया. पूजा को लेकर मंदिर परिसर में काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे. पूरे आयोजन के दौरान क्षेत्र में धार्मिक और उत्सवी माहौल बना रहा.
