बहरागोड़ा: मिट्टी में सपने गढ़ रहे मूर्तिकार, बढ़ती लागत ने तोड़ी कमर; फिर भी आस्था के पर्व को संवारने में जुटे

बहरागोड़ा में महंगाई के कारण मूर्ति निर्माण की लागत बढ़ गई है, जिससे मूर्तिकारों का मुनाफा कम हो गया है। जानिए क्या है पूरी खबर और मूर्तिकारों की समस्या।

बहरागोड़ा: विश्वकर्मा पूजा और गणेश पूजा को लेकर बहरागोड़ा प्रखंड के जगन्नाथपुर व गामारिया के मूर्तिकार विश्वनाथ नायक और भक्ति प्रसाद दत्त मूर्तियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं.मूर्तिकार इस वर्ष 30 से अधिक भगवान विश्वकर्मा और गणेश की प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं. मूर्तिकारों ने बताया कि पुआल, सुतली, चिकनी मिट्टी, कांटी और बांस समेत अन्य सामग्री के दाम बढ़ने से लागत बढ़ गयी है.

इसके बावजूद मेहनत और खर्च के अनुरूप मुनाफा नहीं मिल पा रहा है. इस बार एक-दो हजार से लेकर पांच हजार तक की प्रतिमाएं तैयार की जा रही है. रंग-रोगन का काम भी शुरू हो गया है. पूजा नजदीक आते ही ग्राहक एडवांस बुकिंग के लिए पहुंचने लगे हैं. अब तक करीब 10-15 प्रतिमाओं की बुकिंग हो चुकी है.

बताया कि कई बार मूर्ति तैयार होने के बाद भी बिक्री नहीं हो पाती, जिससे नुकसान उठाना पड़ता है. बरसात में मूर्तियों को तैयार करना और सुखाना भी चुनौती है. एक प्रतिमा को पूरी तरह सूखने में एक सप्ताह से अधिक समय लग जाता है. मूर्तिकारों ने सरकार से उनके हित में योजनाएं चलाने और पेंशन की व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि वर्षों पुरानी इस कला और परंपरा को जीवित रखा जा सके.


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By Prabhat khabar news desk

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