Jamshedpur News : अस्पताल में व्यवस्थाएं ठीक नहीं, काफी सुधार की जरूरत : संयुक्त सचिव

Jamshedpur News : डिमना रोड स्थित एमजीएम अस्पताल का शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव डॉ ललित मोहन शुक्ला, निदेशक मेडिकल एजुकेशन डॉक्टर सुभाशीष सरकार व रांची रिम्स के डॉ भट्टाचार्य ने पूरे अस्पताल का निरीक्षण किया.

बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और अनुभवी डॉक्टर के बावजूद व्यवस्थाएं कमजोर क्यों :

टीम ने अव्यवस्था पर जतायी नाराजगी, सुधार के निर्देश

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डिमना रोड स्थित एमजीएम अस्पताल का शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव डॉ ललित मोहन शुक्ला, निदेशक मेडिकल एजुकेशन डॉक्टर सुभाशीष सरकार व रांची रिम्स के डॉ भट्टाचार्य ने पूरे अस्पताल का निरीक्षण किया. एमजीएम अस्पताल में इलाज की सुविधाओं के विस्तार और पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) सीटों में बढ़ोतरी को लेकर स्वास्थ्य विभाग की तीन सदस्यीय टीम शुक्रवार को अस्पताल निरीक्षण करने पहुंची थी. निरीक्षण के दौरान जहां कई कमियां उजागर हुयीं, वहीं सुपर स्पेशलिटी सेवाएं जल्द शुरू करने के स्पष्ट निर्देश भी दिये गये. टीम ने सबसे पहले इमरजेंसी, ओपीडी, वार्ड, ऑपरेशन थियेटर और अन्य प्रमुख इकाइयों का दौरा किया. निरीक्षण के दौरान इमरजेंसी विभाग की अव्यवस्थित स्थिति पर टीम ने नाराजगी जतायी. अधिकारियों ने इमरजेंसी को सुव्यवस्थित करने, लिफ्ट पर लिफ्ट मैन की नियमित तैनाती, पुराने व अनुपयोगी उपकरणों को हटाकर नये उपकरण लगाने तथा ऑपरेशन थियेटर के बाहर मरीजों और परिजनों के लिए बैठने की उचित व्यवस्था करने के निर्देश दिये. निरीक्षण के दौरान मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ डी हांसदा, डॉ संजय कुमार मौजूद थे.

निरीक्षण के बाद सभी विभागाध्यक्षों के साथ की बैठक

संयुक्त सचिव डॉ ललित मोहन शुक्ला ने निरीक्षण के बाद अस्पताल के सभी विभागाध्यक्षों के साथ बैठक की. उन्होंने अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों और डॉक्टरों की संख्या की जानकारी ली. साथ ही प्रतिदिन कितने मरीज आ रहे, कितने भर्ती हो रहे, कितने का ऑपरेशन हो रहा और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी ली. अस्पताल में किन संसाधनों की कमी है, इसकी भी पूरी जानकारी ली. उसके बाद उन्होंने कर्मचारी व मरीजों से संबंधित रजिस्टर को देखा. बैठक में उन्होंने कहा कि आखिर कारण क्या है कि इतना अच्छा भवन और योग्य चिकित्सक होने के बावजूद अस्पताल बेहतर ढंग से संचालित नहीं हो पा रहा है. उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों की तुलना में यहां बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और अनुभवी डॉक्टर मौजूद हैं, फिर भी व्यवस्थाएं कमजोर क्यों हैं. अस्पताल के डॉक्टर बाहरी दवा लिख रहे हैं, तो यह गलत है. इसकी जांच होनी चाहिए.

विभागाध्यक्ष सरकारी राशि क्यों नहीं कर रहे खर्च

संयुक्त सचिव डॉ ललित मोहन शुक्ला ने कहा कि सरकार प्रत्येक विभागाध्यक्ष को पांच-पांच लाख रुपये खर्च करने के लिए उपलब्ध करा रही है, बावजूद राशि खर्च क्यों नहीं हो रही है. क्या अधिकारी और डॉक्टर काम नहीं करना चाहते हैं. अस्पताल में हार्ट, न्यूरो, कैंसर और प्लास्टिक सर्जरी जैसी सुपर स्पेशलिटी सेवाएं शुरू करने पर विशेष रूप से चर्चा की. अधिकारियों ने बताया कि इन विभागों में एक-एक विशेषज्ञ चिकित्सक की नियुक्ति हो चुकी है. उन्होंने सभी यूनिट को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द शुरू करने के लिए कहा. वहीं आउटसोर्स में काम करने वाले कर्मचारियों की गिनती की. उन्होंने कहा कि अस्पताल की व्यवस्था ठीक नहीं है. खासकर अस्पताल के इमरजेंसी, ओटी, आइसीयू में अभी काफी सुधार की जरूरत है. सभी को आपसी तालमेल बनाकर कार्य करने की जरूरत है. अस्पताल में मैनपावर की कमी बतायी गयी.

ओटी में ड्रेस में नहीं थे डॉक्टर

संयुक्त सचिव ने निरीक्षण के दौरान पाया कि अस्पताल के ओटी में तैनात डॉक्टर ड्रेस में नहीं थे. इसपर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए सभी को ड्रेस में आने का निर्देश दिया. इसके साथ ही आइसीयू में मॉनिटर की संख्या बढ़ाने के साथ प्रशिक्षित कर्मचारियों को लगाने को कहा. वहीं इमरजेंसी में गंदगी व फेंकी गयी स्लाइन की बोतल और सूई देख भड़क गये. कहा कि यदि किसी को सूई गड़ जाये, तो क्या होगा. तुरंत सफाई कराएं और ऐसी अव्यवस्था दोबारा न दिखे, इसका ध्यान रखें

कैथ लैब के लिए उपकरण खरीदारी का निर्देश

एमजीएम अस्पताल परिसर में बने कैथ लैब के बारे में जानकारी ली. भवन निर्माण निगम लिमिटेड के पदाधिकारियों ने बताया कि अभी कैथ लैब में कुछ काम बाकी है. उसके बाद ही इसको चालू किया जा सकता है. सचिव ने कैथ लैब के लिए उपकरणों की खरीदारी करने को कहा.

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Author: RAJESH SINGH

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