जिनके संघर्ष से मिला झारखंड, आज उन्हीं वीरों का हुआ सम्मान, इन 6 आंदोलनकारियों को मिला प्रशस्ति पत्र

जमशेदपुर में आयोजित एक भव्य समारोह में अलग झारखंड राज्य के निर्माण के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले आंदोलनकारियों को सम्मानित किया गया. छह प्रमुख आंदोलनकारियों को झारखंड सरकार की ओर से प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए.

जमशेदपुर : अलग झारखंड राज्य के निर्माण की लड़ाई में अपना सब कुछ न्योछावर करने वाले आंदोलनकारियों को शनिवार को जमशेदपुर प्रखंड परिसर में सम्मानित किया गया. झारखंड आंदोलन के इन वीर सेनानियों के संघर्ष, साहस और बलिदान को याद करते हुए आयोजित सम्मान समारोह में छह प्रमुख आंदोलनकारियों को झारखंड सरकार की ओर से जारी प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए.

आंदोलनकारियों के परिवारों को भी मिला सम्मान

समारोह में माहौल उस वक्त भावुक और गौरवपूर्ण हो गया, जब वर्षों तक अलग राज्य के लिए संघर्ष करने वाले आंदोलनकारियों और उनके परिवारों को सम्मान मिला. प्रशासनिक अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने कहा - आज का झारखंड उन अनगिनत संघर्षों और बलिदानों की देन है, जिन्हें आंदोलनकारियों ने अपने जीवन का हिस्सा बना लिया था.

इन 6 आंदोलनकारियों को मिला सम्मान

जमशेदपुर प्रखंड विकास पदाधिकारी सुमित प्रकाश ने झारखंड सरकार की ओर से जारी आधिकारिक प्रशस्ति पत्र आंदोलन के छह प्रमुख आंदोलनकारियों को सौंपे. सम्मान पाने वालों में मानिक सांडिल, निबारन महतो, मधुसूदन सिंह, धीरेंद्र नाथ महतो, गुरुपद महतो एवं फ्रेंकलीन बनसीयार शामिल रहे. प्रशस्ति पत्र प्राप्त करते समय आंदोलनकारियों और उनके परिजनों के चेहरों पर गर्व और खुशी साफ नजर आई. यह सम्मान केवल एक प्रमाण पत्र नहीं, बल्कि झारखंड के निर्माण में उनके संघर्ष और योगदान के प्रति सम्मान की सार्वजनिक स्वीकृति के रूप में देखा गया.

आंदोलनकारियों की संघर्षगाथा प्रेरणा का स्रोत : कुसुम

कार्यक्रम में स्थानीय क्षेत्र की जिला परिषद सदस्य कुसुम पूर्ति भी विशेष रूप से मौजूद रहीं. उन्होंने आंदोलनकारियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा - आज हम जिस अलग झारखंड राज्य में रह रहे हैं, उसकी नींव इन्हीं वीर सेनानियों और पुरखों के लंबे संघर्ष, त्याग और बलिदान से मजबूत हुई है. उन्होंने कहा - आंदोलनकारियों की संघर्षगाथा केवल इतिहास का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है.


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लेखक के बारे में

By दशमत सोरेन

दशमत सोरेन ने रांची विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर किया है. वे 29 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उनकी विशेषज्ञता मुख्य रूप से झारखंड की आदिवासी-मूलवासी राजनीति, स्थानीय समुदायों की भाषा-संस्कृति और यहां के सामाजिक ताना-बाना है. वे वर्ष 2010 से प्रभात खबर के साथ एक ट्राइबल रिपोर्टर के रूप में काम कर रहे हैं.

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