जमशेदपुर : टाटा स्टील गम्हरिया (अधिग्रहित उषा मार्टिन) के कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है. प्रबंधन और टाटा कामगार यूनियन के बीच ऐतिहासिक ग्रेड रेशनलाइजेशन समझौता हुआ है. इसके तहत लंबे समय से चले आ रहे 51 अलग-अलग ग्रेड्स को रेशनलाइज कर मात्र छह सुव्यवस्थित ग्रेड में समेट दिया गया है. इस ऐतिहासिक पुनर्गठन के साथ ही प्लांट के 545 कर्मचारियों को एक साथ पदोन्नति का लाभ दिया गया है. सबसे खास बात यह है कि इस योजना में 100 प्रतिशत कर्मचारियों को कवर किया गया है. समझौता पर टाटा स्टील के सीएचआरओ (इंडिया) जुबिन पालिया, चीफ एचआरबीपी यशवंत कुमार पांडेय और एचआरबीपी रोहन कुमार ने प्रबंधन की ओर से और टाटा कामगार यूनियन की ओर से अध्यक्ष बीके डिंडा ने हस्ताक्षर किये. इस फैसले के बाद से कर्मचारियों में खुशी है.
हर चार वर्ष पर मिलेगी पदोन्नति
नये नियमों के अनुसार, प्रत्येक कर्मचारी को हर चार वर्ष के अंतराल पर पदोन्नति के निश्चित अवसर मिलेंगे. तकनीकी पदों पर आगे बढ़ने के लिए आइटीआइ योग्यता या निर्धारित परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा, जिससे कर्मचारियों को अपनी क्षमता साबित करने का मौका मिलेगा. 51 जटिल ग्रेड को समाप्त कर छह सरल श्रेणी में बदलना बड़ी चुनौती थी, जिसे यूनियन और प्रबंधन ने आपसी तालमेल से सुलझा लिया.
स्पष्ट, व्यवस्थित और पारदर्शी करियर ग्रोथ पॉलिसी की रखी नींव
नौ वर्ष पूर्व टाटा स्टील द्वारा उषा मार्टिन के अधिग्रहण के बाद से अब तक स्पष्ट प्रमोशन पॉलिसी और निर्धारित ढांचा नहीं होने के कारण किसी भी कर्मचारी को तरक्की नहीं मिल पायी थी. उषा मार्टिन के दौर में भी कोई पारदर्शी व्यवस्था नहीं होने से चुनिंदा कर्मचारियों को ही व्यक्तिगत पसंद के आधार पर लाभ मिलता था. इस समझौते से न केवल वर्तमान गतिरोध समाप्त हुआ है, बल्कि भविष्य के लिए भी एक स्पष्ट, व्यवस्थित और पारदर्शी करियर ग्रोथ पॉलिसी की नींव रख दी गयी है.
