हरपाल सिंह ने अखिलेश को पहचानने से किया इनकार

20 मार्च 2009 को घाघीडीह सेंट्रल जेल में परमजीत सिंह की गोली मारकर हुई थी हत्या हीरे के बयान पर अखिलेश सिंह, अमलेश सिंह, मनोज सिंह उर्फ भोला सिंह, मनोरंजन सिंह उर्फ लल्लू, प्रमोद सिंह उर्फ गौतम के खिलाफ दर्ज की गयी थी प्राथमिकी जमशेदपुर : घाघीडीह सेंट्रल जेल में परमजीत सिंह की हत्या के […]

20 मार्च 2009 को घाघीडीह सेंट्रल जेल में परमजीत सिंह की गोली मारकर हुई थी हत्या

हीरे के बयान पर अखिलेश सिंह, अमलेश सिंह, मनोज सिंह उर्फ भोला सिंह, मनोरंजन सिंह उर्फ लल्लू, प्रमोद सिंह उर्फ गौतम के खिलाफ दर्ज की गयी थी प्राथमिकी

जमशेदपुर : घाघीडीह सेंट्रल जेल में परमजीत सिंह की हत्या के मामले के सूचक हरपाल सिंह हीरे ने एडीजे 13 की अदालत में अखिलेश सिंह को पहचानने से इनकार कर दिया. गुुरुवार को अखिलेश सिंह को वीसी से कोर्ट में पेश किया गया. हरपाल सिंह हीरे ने कोर्ट को बताया कि अखिलेश सिंह द्वारा साजिश रचकर परमजीत सिंह की हत्या करायी गयी थी. घाघीडीह जेल में बंद अखिलेश सिंह के समर्थक मनोरंजन सिंह लल्लू ने गौतम को पिस्तौल दी. जिससे गौतम ने गोली मारकर परमजीत सिंह की हत्या की थी. कोर्ट में बयान देने के बाद हरपाल सिंह हीरे वापस लौट गया.

गुरुवार को हीरे अपने करीब 15-20 समर्थकों के साथ कोर्ट में पहुंचा था. हीरे के कोर्ट पहुंचने की भनक पुलिस को नहीं थी. कोर्ट में गवाही देने के बाद हीरे समर्थकों के साथ वहां से चला गया. मालूम हो कि परमजीत सिंह हत्याकांड में अदालत ने मनोरंजन सिंह लल्लू को दो फरवरी 2018 को और मनोज सिंह भोला को 14 दिसंबर 2018 को आजीवन कारावास की सजा सुनायी है. केस में अखिलेश सिंह को हत्याकांड का साजिशकर्ता बताया गया है.

उल्लेखनीय है कि 20 मार्च 2009 को घाघीडीह सेंट्रल जेल में बंद अखिलेश सिंह के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी परमजीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. परमजीत सिंह नहाने के लिए चापाकल के पास बैठा था. इसी दौरान अखिलेश गिरोह के सदस्य मनोरंजन सिंह उर्फ लल्लू, प्रमोद सिंह उर्फ गौतम और भोला ने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी थी. परमजीत सिंह की हत्या के बाद उसके समर्थकों ने गौतम को मौके पर पीट-पीटकर मार डाला था.

परमजीत सिंह की हत्या के बाद उसके समर्थक हरपाल सिंह हीरे के बयान पर परसुडीह थाना में अखिलेश सिंह, अमलेश सिंह, मनोज सिंह उर्फ भोला सिंह, मनोरंजन सिंह उर्फ लल्लू, प्रमोद सिंह उर्फ गौतम के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. बाद में अमलेश सिंह का नाम केस से हटा दिया गया. मामले में गवाह कार्तिक मुंडा ने 9 जनवरी 2012 को गवाही में अदालत को बताया था कि 20 मार्च 2009 को परमजीत सिंह नहाने की तैयारी में था.

इसी बीच गांधी कक्ष से पिस्तौल लेकर निकले मनोरंजन सिंह उर्फ लल्लू, गौतम व भोला ने परमजीत सिंह को घेर कर सिर और पीठ में सटाकर गोली मार दी. गोली मारने के बाद पिस्तौल लेकर भोला व लल्लू गांधी कक्ष में चले गये जबकि गौतम नेहरू कक्ष में चला गया. हीरे के आवाज लगाने पर वे लोग परमजीत को लेकर कारा के मुख्य द्वार की ओर पहुंचे.

वहां से वापसी के बाद यह पता चला कि अखिलेश सिंह से परमजीत सिंह का विवाद चल रहा था. उसने ही साजिश कर हत्या करवा दी. हत्या के पीछे अखिलेश का उद्देश्य शहर में वर्चस्व कायम करना था. कुछ समय बाद यह सूचना मिली कि गौतम की बंदियों ने पिटाई कर दी, जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गयी. वह भोला व लल्लू को पहचानता है.

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