जमशेदपुर : पूर्व सीएस के बेटे के खिलाफ दहेज प्रताड़ना की प्राथमिकी
जमशेदपुर : पूर्व सिविल सर्जन एनके प्रसाद के बेटे डॉ हर्षवर्द्धन पर उनकी पत्नी नेहा भूषण ने दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराया है. नेहा ने अपनी शिकायत कोर्ट में दर्ज कराई है. नेहा एमजीएम अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ अंजनी भूषण की पुत्री हैं. सोमवार को परिवार न्यायालय में तारीख […]
जमशेदपुर : पूर्व सिविल सर्जन एनके प्रसाद के बेटे डॉ हर्षवर्द्धन पर उनकी पत्नी नेहा भूषण ने दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराया है. नेहा ने अपनी शिकायत कोर्ट में दर्ज कराई है. नेहा एमजीएम अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ अंजनी भूषण की पुत्री हैं. सोमवार को परिवार न्यायालय में तारीख पर आये अंजनी भूषण ने बताया कि दामाद हर्षवर्द्धन और उनका परिवार शादी के बाद से दहेज के लिए परेशान कर रहा है.
नेहा और हर्षवर्द्धन की शादी 14 दिसंबर 2012 में हुई थी. अंजनी के अनुसार शादी के वक्त उन्होंने दहेज के रूप में पांच लाख नकद, 6.5 लाख के गहने और एक आइ20 कार दिया था. बावजूद बेटी को प्रताड़ित करने का क्रम नहीं रुका. हर्षवर्द्धन 2015 में नेहा को लेकर बेंगलुरु चला गया. पहले फ्लैट खरीदने फिर नर्सिंग होम खोलने के नाम पर 20 लाख रुपये की मांग हर्षवर्द्धन ने की.
प्रताड़ना से तंग आकर नेहा 2018 जुलाई में भाग कर जमशेदपुर आ गयी. इसके बाद बेटी पर हो रहे अत्याचार की जानकारी होने पर पिता डॉ भूषण जुलाई में साकची थाना शिकायत लेकर गये थे, तो थाना प्रभारी ने आपस में मामला सुलझाने की राय दी. बाद में डॉ भूषण ने कोर्ट में मामला
दर्ज कराया.
बेटी ने अपने पसंद से की थी शादी. डॉ भूषण और डॉ एनके प्रसाद का परिवार साकची टीबी अस्पताल के पास रहता था. नेहा ने अपनी पसंद से हर्षवर्द्धन से शादी की थी. नेहा ने पिता को बताया कि पति हर्षवर्द्धन का दूसरी महिला से भी संबंध में है, उसे उसने बेंगलुरु में अलग से फ्लैट देकर रखा हुआ है.
संतान जन्म होने तक नहीं दिया
हर्षवर्द्धन की मां पुष्पलता प्रसाद भी एमजीएम अस्पताल में क्लर्क है. हर्षवर्द्धन के बड़ी बहन की शादी 2010 में हुई थी. लेकिन उसे संतान नहीं हो रही थी. इसे उसने बेटा को शर्त दे दिया था कि जब तक बेटी का संतान नहीं होगी बहू को भी नहीं होनी चाहिए. इस वजह से हर्षवर्द्धन ने संतान के बारे में नहीं सोचा. पुष्पलता को उनके पति पूर्व सिविल सर्जन डॉ एनके प्रसाद के मृत्यु के बाद अनुकंपा पर नौकरी दी गई थी.