जमशेदपुर : युवाओं के लव एथंम अाैर कई भाषाअाें में महारथ हासिल कवि कुमार विश्वास पांच अक्तूबर काे प्रभात खबर द्वारा आयाेजित गुरु सम्मान समाराेह में शिरकत करेंगे. एक्सएलआरआइ प्रेक्षागृह में शुक्रवार की शाम साढ़े पांच बजे से गुरु सम्मान समाराेह का आयाेजन किया गया है. इसमें काेल्हान के 35 से अधिक शिक्षाविद्-गुरुआें का सम्मान किया जायेगा. इसके बाद मशहूर कवि कुमार विश्वास की महफिल जमेगी. काेई दीवाना कहता है… काेई पागल समझता है कविता से शोहरत की बुलंदियों तक पहुंचे कुमार विश्वास की कविताओं की महफिल देर शाम तक जारी रहेगी.
हिंदी कविता को मंच से प्रतिष्ठित किया
भाषा विज्ञानियों का कहना है कि किसी भी भाषा की उन्नति उसके अधिक से अधिक प्रसार में है. कोई भाषा जितने अधिक लोगों द्वारा बोली जायेगी, उतनी ही मजबूत होगी. हिंदी के बारे में जब हम सोचते हैं तो कुछ छवियां मन मस्तिष्क में उभरती हैं, उनमें डॉक्टर कुमार विश्वास का नाम प्रमुख है. उन्होंने अपनी कविताओं, शायरी, लाजवाब संवाद अदायगी और सुरीले कंठ की बदौलत हिंदी को दुनियाभर में प्रतिष्ठित किया.
प्रभात खबर के सम्मान समाराेह में कुमार …जब भी मुंह ढंक लेता हूं…तेरे जुल्फों की छांव में…कोई दीवाना कहता है… समेत लड़ी के रूप में वे कई काव्य पाठ करेंगे. समाराेह में कवि मुमताज नसीम एवं कवि मंजर भोपाली भी अपनी दमदार प्रस्तुति देंगे.कुमार विश्वास एक ऐसे कवि हैं, जिन्हाेंने दिल की आवाज को सुनकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ी दी, पीसीएस की नौकरी भी छोड़ दी.
कविता और हिंदी ने इन्हें इस तरह अपनी ओर खींचा कि हिंदी की सेवा में लग गये. मोहब्बत के शायर, शब्दों के धनी और अपनी कविताओं से दुनिया का रुख हिंदी की तरफ मोड़ देने वाले डॉक्टर कुमार विश्वास ने जिस तन्मयता से हिंदी की सेवा की है, वह हिंदी समाज के लिए एक प्रेरणा है. हिंदी के इस मुखर कवि ने जब मंच से गीत गाया-‘कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है’ तो लाखाें युवाओं ने इसे हाथों-हाथ लिया और अपना प्रेम गान बना लिया.
लोगों की ऐसी समझ बनती है कि कुमार विश्वास ने अपनी प्रेम कविताओं के माध्यम से लोगों के दिलों में जगह बनायी, इससे इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन सत्य यह भी है कि कुमार ने कविता के लिए बहुत सरल और सहज हिंदी का चुनाव किया.
