खासमहल में सिदो-कान्हू की बेदी पर हुआ विवाद, थाने पर हंगामा

जमशेदपुर : हूल दिवस के मौके पर शनिवार को परसुडीह के चार खंभा चौक पर सिदो-कान्हू की बेदी स्थापित करने को लेकर बवाल हो गया. बाहागढ़ के ग्रामीणों द्वारा सिदो-कान्हू की बेदी स्थापित करने के लिए बनाये जा रहे चबूतरा को तोड़े जाने के बाद दो पक्षों में मारपीट हो गयी. संघर्ष में कुछ लोगों […]

जमशेदपुर : हूल दिवस के मौके पर शनिवार को परसुडीह के चार खंभा चौक पर सिदो-कान्हू की बेदी स्थापित करने को लेकर बवाल हो गया. बाहागढ़ के ग्रामीणों द्वारा सिदो-कान्हू की बेदी स्थापित करने के लिए बनाये जा रहे चबूतरा को तोड़े जाने के बाद दो पक्षों में मारपीट हो गयी. संघर्ष में कुछ लोगों को हल्की चोट भी आयी है. मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों के लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया. लेकिन तब तक आसपास के लोग मौके पर जुट गये और नारेबाजी करने लगे.
फिर सभी ने परसुडीह थाने की घेराव कर दिया. परसुडीह थाना प्रभारी अनिमेष गुप्ता ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को समझा कर मामला शांत कराया और सशर्त वहां पूजा-अर्चना करने की अनुमति दे दिया. घटना के समय झामुमो समेत अन्य सामाजिक संगठन के लोग भी ग्रामीणों के समर्थन में खड़े हो गये. कार्यक्रम स्थल पर बहादुर किस्कू, सागेन पूरती, डेमका सोय, देवजीत मुखर्जी, कुमार चंद्र मार्डी, जाकता सोरेन, शैलेंद्र महतो, तपन माझी, धीरेन मार्डी, लखन सोरेन, मंटू गोप, सनत मंडल, उदय मार्डी समेत पहुंच गये थे.
चंद्रभूषण सिंह का परिवार कर रहा है जमीन पर अपना दावा : खासमहल चौक पर चार खंभा के सामने जमीन का एक खाली प्लॉट है. सुबह करीब 10 बजे बाहागढ़ के ग्रामीण ग्राम प्रधान माझी बाबा आनंद हांसदा के नेतृत्व में वहां पहुंचे और वे वहां सिदो-कान्हू की पूजा-अर्चना के लिए बेदी बनाने लगे. कुछ देर में खासमहल के चंद्रभूषण सिंह के बेटे सुबोध कुमार सिंह अपने परिवार के लोगों के साथ वहां पहुंचे. उनका कहना था कि पूजा स्थल वाली जमीन उनकी है. वे बेदी को तोड़ने लगे. इस पर पूजा करने आये ग्रामीण भड़क गये और दोनों में संघर्ष हो गया.
15 सालों से करते आ रहे हैं पूजा-अर्चना : ग्रामीण
बाहागढ़ के ग्रामीणों का कहना है कि वे जिस जमीन पर सिदो-कान्हू की बेदी बना रहे थे, उस पर वे तकरीबन 15 साल से सामूहिक रूप से पूजा-पाठ कर रहे हैं. इसलिए जिस जगह पर वे पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं, उस जगह पर उनका दावा बनता है. खासमहल की जमीन पर चंद्रभूषण सिंह के परिवार का दावा उचित नहीं है. जमीन उनकी नहीं है. वे वहां आने वाले दिनों में सिदो-कान्हू की मूर्ति स्थापित करके रहेंगे.

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