मां चाहती है छोटी-मोटी नौकरी कर परिवार चलाना, बेटी चाहती है पढ़ना, ''प्रभात खबर'' के खुलासे के बाद दोनों को प्रशासन ने भेजा था रांची

जमशेदपुर : बर्मामाइंस के एक क्वार्टर में बेटी के साथ कई माह से गुमनामी की जिंदगी जी रही मां-बेटी इलाज के बाद रांची से स्वस्थ होकर शहर लौट आयी है. अभी मां-बेटी बर्मामाइंस स्थिति रुइयां पहाड़ में परिवार के साथ हैं. लंबे समय बाद परिवार के बीच लौटी युवती ने कहा कि अभी वह ठीक […]

जमशेदपुर : बर्मामाइंस के एक क्वार्टर में बेटी के साथ कई माह से गुमनामी की जिंदगी जी रही मां-बेटी इलाज के बाद रांची से स्वस्थ होकर शहर लौट आयी है. अभी मां-बेटी बर्मामाइंस स्थिति रुइयां पहाड़ में परिवार के साथ हैं. लंबे समय बाद परिवार के बीच लौटी युवती ने कहा कि अभी वह ठीक है और वह आगे पढ़ना चाहती है.
उनकी टीचर और समाजसेवी मीरा शर्मा से उन्होंने आग्रह किया कि वह उसके पढ़ाई का इंतजाम करा दें. जबकि युवती की मां का कहना है कि कोई छोटी-मोटी नौकरी उन्हें दिला दी जाये ताकि वह अपनी बेटी का लालन-पालन कर सके. गौरतलब है कि बर्मामाइंस के एक कंपनी क्वार्टर में मां ने अपनी 16 साल की बेटी को दो साल तक घर में अंधेरे कमरे में बंद कर रखा था. महिला का तलाक 10 साल पूर्व हो चुका था.
तब से वह अपनी एक बेटी को लेकर घर के भीतर रहती थी. मां को डर था कि कहीं वहशी दरिंदे उसकी बेटी के साथ कुछ गलत न कर दें. गुमनामी के अंधेरे में युवती ने दीवारों पर अपने साथ हुए अत्याचार को शब्दों में बयां किया था जो किसी इनसान के दिल को झकझोर दे. प्रभात खबर द्वारा मामले को प्रमुखता से उठाया गया था. समाजसेवी मीरा शर्मा की पहल और प्रभात खबर में खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन और पुलिस ने मां-बेटी को सुरक्षा में रिनपास, रांची भेजा. दो माह तक चले इलाज के बाद दोनों मां-बेटी परिवार के बीच लौट आयीं है.

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